NSCN-IM और सरकार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर

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नई दिल्ली। सरकार ने एक संसदीय पैनल को सूचित किया है कि उसने ‘विशेष स्थिति’ के साथ राज्य संघ के भीतर समझौते पर सहमत होने के बाद नेशनल सोशलिस्ट काउन्सिल ऑफ नगालैंड-आइसक-मुइवा (NSCN-IM) के साथ एक ढांचागत समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह पहली बार है कि 3 अगस्त, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हस्ताक्षरित इस समझौते का ब्योरा प्रकट हुआ है। समझौते का यह विवरण हाल ही में राज्यसभा में संसदीय स्थायी समिति द्वारा प्रस्तुत पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा स्थिति पर 213वीं रिपोर्ट का हिस्सा है।

 

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समिति को यह भी बताया गया है कि ‘रूपरेखा’ को ढांचागत समझौते में दर्शाया गया था, जो भारत सरकार द्वारा नगा इतिहास की विशिष्टता की मान्यता के बारे में था। समिति को यह भी बताया गया है कि नगाओं के लिए कुछ विशेष व्यवस्थाएं की जानी चाहिए। यह पूछे जाने पर कि विशेष व्यवस्थाएं क्या होगी, संसदीय पैनल को बताया गया कि नागालैंड के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 371A में बात को स्पष्ट किया गया है कि नागा विशेष हैं और उन्हें विशेष दर्जा दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, नगा अब सरकार के साथ एक आम तालमेल की स्थिति में पहुंच गए हैं। जैसे- राज्यों की सीमाओं को नहीं छुआ जाएगा और जहां कहीं वे हैं उनके लिए कुछ विशेष व्यवस्था की जाएगी। सरकार के साथ वार्ता की व्यापक स्थिति के बारे में समिति को अवगत कराया गया है कि किसी भी राज्य की सीमाएं न तो बदली जाएंगी और न ही बदलेंगी।

प्रारंभ में नागाओं के रिहायशी क्षेत्रों के एकीकरण के विचार पर मामला अटक गया था क्योंकि उन्होंने दृढ़ता से ‘कोई एकीकरण नहीं, कोई समाधान नहीं’ के अपने स्टैंड को बनाए रखा। NSCN-IM ग्रेटर नगालैंड या नगालिम के लिए लड़ रहा है। यह 1.2 मिलियन नगाओं को एकजुट करने के लिए पड़ोसी राज्यों असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में नगा-वर्चस्व वाले क्षेत्रों सहित नगालैंड की सीमाओं का विस्तार करना चाहता है। तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी सीमाओं के साथ किसी भी फेरबदल के खिलाफ चेतावनी भी दी है।

 

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सरकार पिछले 20 सालों से NSCN-IM के साथ बात कर रही है। पिछले कई सालों में सरकार ने NSCN-IM के अलावा नागरिक समाज संगठनों, नगा जनजातीय निकायों और अन्य हितधारकों के जरिए बातचीत से किसी नतीजे पर पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि पूर्वोत्तर में स्थित नगा समुदाय और नगा संगठन ऐतिहासिक तौर पर नगा बहुल इलाकों को मिलाकर एक ग्रेटर नगालिम राज्य बनाने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। ‘नगालिम’ या ग्रेटर नगा राज्य का उद्देश्य मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश के नगा बहुल इलाकों का नगालिम में विलय करना है। यह देश की पुरानी समस्याओं में से एक है।

प्रस्तावित ग्रेटर नगालिम राज्य के गठन की मांग के अनुसार, मणिपुर की 60 प्रतिशत जमीन नगालैंड में जा सकती है। मैतेई और कुकी ये दोनों समुदाय मणिपुर के इलाकों का नगालिम में विलय का विरोध करते हैं।

 

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बता दें कि यह बातचीत 1997 से चल रही है। यह संगठन इलाके के उन कई संगठनों में शामिल है जो चीन, बांग्लादेश और भूटान से लगी सीमा के क्षेत्रों में सक्रीय हैं। ग्रेटर नगालिम की मांग को लेकर NSCN-IM नगा होमलैंड की मांग करता रहा है जिसमें पूर्वोत्तर के कई राज्यों के इलाकों के अलावा पड़ोसी म्यांमार के कुछ इलाके भी शामिल होंगे। यह संगठन 1997 से भारत सरकार के साथ बातचीत कर रहा है।

 

 

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