पुलवामा : जांच का शुरूआती सच, ऐसे हुआ था आत्मघाती हमला

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National News / राष्ट्रीय समाचार

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में बृहस्पतिवार को जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों की बस को टक्कर मार दी, जिसमें 42 जवानों के शहीद होने की आधिकारिक रूप से पुष्टि हुई है। रक्षा अधिकारी ने हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।

आतंकी हमले की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) पुलवामा पहुंची है। शुरुआती जांच में पहली बात जो सामने आई है उसके मुताबिक हमले के लिए आईईडी नहीं बल्कि आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। बताया जा रहा है कि हमलावर आदिल अहमद डार ने आरडीएक्स की मदद से इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था।

इसके बाद दूसरी बात जो सामने आई कि हमले के लिए आरडीएक्स की मात्रा करीब 60 किलो थी। पहले कहा जा रहा था कि विस्फोटक की मात्रा करीब साढ़े तीन सौ किलो थी। 

जांच में तीसरी अहम बात का पता चला है कि जिस वाहन से सीआरपीएफ की बस को टक्कर मारी गई थी वह एसयूवी नहीं एक कार थी जिसमें विस्फोटक भरे हुए थे। सीआरपीएफ की बस को बाईं ओर से ओवरटेक कर विस्फोट किया गया था।

यह धमाका इतना घातक था कि सीआरपीएफ जवानों से भरी बस के परखच्चे उड़ गए। बस जमीन से उछलकर 30 मीटर दूर जा गिरी और उसके पीछे के मजबूत हिस्से के टुकड़े-टुकड़े हो गए। विस्फोटक की तीव्रता इतनी थी कि धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। वहीं एक जवान का शव 80 मीटर दूर जा गिरा।

विशेषज्ञ मान रहे है कि इस आतंकी हमले में जिस तरह मानव बम का इस्तेमाल हुआ है वो बहुत खतरनाक है। इस तरह की चुनौती से निपटना आसान नहीं है। जो भी आतंकी मानव बम बना उसका बहुत ब्रेनवॉश किया गया होगा।

आशंका है कि इतने बड़े हमले की योजना में और भी कई लोग शामिल हैं। संदिग्ध लोगों से पूछताछ जारी है। धमाके वाली जगह से एजेंसियों की जांच जारी है। आस पास के लोगों से पूछताछ और सीसीटीवी को भी खंगाला जा रहा है। हमले में जैश का आतंकी शामिल है। आशंका जताई जा रही है कि इसमें दूसरे आतंकी संगठनों ने मदद की हो।
 

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