पूर्व CM मदनलाल खुराना का संघर्षमय जीवन, BJP से पहले संघ का नाता

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नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व सीएम मदनलाल खुराना का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को देर रात 11 बजे 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से दिल्ली में शोक की लहर है। खुराना बीजेपी के कद्दावर नेताओं में से एक थे। वह बीजेपी की स्थापना होने से पहले ही संघ से जुड़े हुए थे। अचानक ही उनके दुनिया छोड़कर चले जाने से भाजपा को बड़ा आघात लगा है।  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने खुराना को पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं की ओर से शोक प्रकट किया है। 

 

 

पीएम ने जताया दुख

 

वहीं, पीएम नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि पूर्व सीएम मदनलाल खुराना के निधन से दुखी हैं। दिल्ली में बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। देश बंटवारे के बाद दिल्ली आए और कीर्ति नगर स्थित रिफ्यूजी कालोनी में आकर बस गए। मेरी संवेदनाएं आपके परिवार के साथ हैं।  

 


 

आरएसएस व बीजेपी के सदस्य

 

मदनलाला खुराना आरएसएस व भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे। वह एक ऐसे नेता थे जो बीजेपी की स्थापना के पहले ही आरएसएस से जुड़े रहे। पार्टी में उनकी हैसियत कद्दावर नेताओं में होती थी। 1993 से 1996 तक खुराना दिल्ली के सीएम पद पर रहे। इसके बाद 2004 में वह राजस्थान के राज्यपाल नियुक्त किए गए। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह उड्यन मंत्री भी रहे।

 

 

यहां हुआ था जन्म 

 

मदनलाल खुराना का जन्म 15 अक्टूबर 1936 में ब्रिटिश भातर के लायलपुर (वर्तमान फैसलाबाद) में हुआ। उनकी माता का नाम लक्ष्मी देवी और पिता का नाम एसडी खुराना था। भारत पाकिस्तान विभाजन के दौरान उनको अपना घर छोड़ना पड़ा था। इस दौरान वह शरणार्थी शिविर में रहे। जब वह शरणार्थी के तौर पर भारत लौटे थे तो उनकी उम्र महज 12 वर्ष थी। स्नातक की परीक्षा उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज से प्राप्त की। 1959 में वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के महासचिव चुने गए। दिल्ली में वह 1965 से 1967 तक जनसंघ के महासचिव भी रहे। केदारनाथ साहनी और विजय कुमार मल्होत्रा के साथ जनसंघ के प्रमुख नेताओं में प्रसिद्ध रहे।

 

दिल्ली से राजनीति

 

खुराना ने राजनीति की पैठ दिल्ली से ही बनानी शुरू की थी। उनके कार्यों के कारण ही उनको दिल्ली का शेर कहा जाने लगा। 1984 के बाद से बीजेपी को दिल्ली में बीजेपी को मजबूत करने के लिए दिन रात एक करते हुए काम किया। उन्हीं की अगुआई में बीजेपी ने 1993 में दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीता था। उनके सीएम रहते ही दिल्ली को मेट्रो मिली थी। खुराना पूर्व पीएम अटल बिहारी के करीबी और विश्वास पात्र थे। 

 


 

मोदी को पद से हटाने की मांग

 

खुराना बेबाक और निर्भिक विचारों के थे। वह किसी से भी डरते नहीं थे। इसी कारण उनको पार्टी से कई बार निलंबित भी होना पड़ा था। 2005 में उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को गुजरात का सीएम रहने के दौरान पद से हटाने तक की मांग कर दी थी। इसके बाद उनके ऊपर अनुशासनहीनता का आरोप लगा और निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व पर भी सवाल खड़ा कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आडवाणी पार्टी में 'एयरकंडीशंड कल्चर' को बढ़ावा मिल रहा है।


 

साल के लिए निष्कासित

 

खुराना किसी भी बात को लेकर मजबूती से अपना पक्ष रखते थे और एक बार जो बात कह देते पीछे नहीं हटते थे। इसी आदतों को लेकर उनको पार्टी से छह साल के लिए निष्काषित कर दिया गया था। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी आमने-सामने आ गए थे। अटल खुरान के समर्थन में खुलकर आ गए। 


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