राम मंदिर मामला: अध्यादेश लाने के लिए संतों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

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नई दिल्ली। राम मंदिर निर्माण को लेकर जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, राजनीतिक सियासत और भी गरमाती जा रही है। दिल्ली स्थित तालकटोरा में संतों ने धर्मादेश सम्मेलन में एकजुट होकर सरकार को चुनाव से पहले अध्यादेश लाकर राम मंदिर निर्माण का अल्टीमेटम दिया है। धर्मादेश में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। स्वामी रामभद्रचार्य ने कहा कि राम मंदिर या तो अध्यादेश के जरिए बनेगा या आपसी समझौते से। अब आलत बेकाबू होता जा रहा है, संतों का सब्र भी टूट रहा है। संतो ने कहा है कि हर हाल में राम मंदिर का निर्माण होगा। इब किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। धर्मादेश सम्मेलन में 3 हजार से अधिक साधु और संत शामिल हुए।

 


                
 

आग्रह नहीं आदेश

 

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्र नंद सरस्वती ने साफ शब्दों में यह स्पष्ट कर दिया कि राम मंदिर बनाने के लिए उनका ये आग्रह नहीं बल्कि आदेश है। चुनाव से पहने यह पवित्र काम पूरा हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहले भी बहुत कुछ हो चुका है। अध्यादेश लाकर मंदिर का निर्माण सरकार कराए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो संतों का रास्ता पता है कि क्या करना है। बता दें कि दो दिवसीय धर्मादेश सम्मेलन में कई दिग्गत संत एकजुट हुए थे। संतों ने यह भी कहा कि रोहिंग्याओं को देश से बाहर किया जाए। असम जैसी ही एनआरसी की व्यवस्था देशभर में लागू हो। घुसपैठियों के लिए यहां कोई भी जगह नहीं है। 

 

 

क्यों टाला जा रहा मामला

 

रामभद्रचार्य ने तर्क देते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट एक आतंकी के लिए रात में खोला जा सकता है, तो राम मंदिर मसले पर मामले को क्यों लंबे समय के लिए टालने का काम किया जा रहा है। यह लोगों की अस्था से जुड़ा सवाल है। कोर्ट का वह सम्मान करते हैं, लेकिन राम मंदिर निर्माण का कार्य सभी का अधिकार है। देश में कोई भी इस विषय पर भले ही गंभीर नहीं हो, संत समाज अब अधिक नहीं रुक सकते। आरएसएस ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1992 के आंदोलन का संकेत दे दिया है। वहीं, केन्द्रीय मंत्री गिरिराज ने कहा कि सौ करोड़ जनता राम मंदिर के मुद्दे को लेकर गंभीर है। आतंकियों के लिए सुप्रीम कोर्ट रात में खुलती है। ऐसे में धार्मिक मामलों में देरी क्यों की जा रही।

 

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