सबरीमाला मंदिर विवाद: सरकार से बात नहीं करेंगे पु​जारी, कोर्ट में पुनर्विचार याचिका

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राष्ट्रीय समाचार/National News

 

नई दिल्ली। केरल के सबरीमाला मंदिर का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंदिर के मुख्य पु​जारी ने सरकार से किसी भी तरह की वार्ता से इंकार कर दिया है। गौरतलब है कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पुजारियों ने प्रतिबंध लगा रखा था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो इस प्रतिबंध को गलत करार देते हुए कोर्ट ने महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी। वहीं, पंडालम रॉयल्स ने कहा कि सराकर से वार्ता करने पर भी कोई फायदा नहीं हैं। चूंकि एलडीएफ सरकार ने कोर्ट का आदेश लागू कराने को लेकर पहले ही निर्णय ले चुका है। पूर्ववर्ती राज परिवार भगवान अयप्पा के मंदिर से जुड़ा रहा है। वहीं, ममाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है।

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श्रद्धालुओं का प्रदर्शन जारी

 

बताते चलें कि यहां मंदिर में सालों पुरानी परंपरा धार्मिक अनुष्ठान और आस्था को बनाए रखने के लिए भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से पुजारी परिवार और पंडालम रॉयल्स के मेंबरों को सीएम पिनरायी विजयन से वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है। इस पर तीन पुजारियों ने वार्ता नहीं करने की बात ही है। वर्ता नहीं कने की वजह यही बताई है कि सराकर से बातचीत करने का कोई मतलब नहीं निकलने वाला है। चूंकि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा के लिए दोबारा न्यायालय जाने को तैयार नहीं हैं। 

 

अधिकारियों के साथ बातचीत

 

गौरतलब है कि गत 28 सितंबर को जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षा वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश वर लगी रोक को हटाने का ओदश सुनाया था। वहीं, मोहनारू ने चेंगन्नूर में यह बात कही थी कि वह समीक्षा याचिका दायर करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह पंडालम शाही परिवार का पक्ष जानने के लिए इस विषय पर उच्च अफसरों से वार्ता करेंगे।

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पहले के आदेश को चुनौती

 

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को गलत ठहराया था। कोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश पर मंदिर के पुजारियों ने निराशाजनक करार दिया था। अब इस मसले पर नेशनल अय्यपन डिवोटी एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर पहले के आदेश को चुनौती दी गई है।

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