संभल के खेलें गुलाल, इसलिए विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

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नई दिल्ली। देश भर में होली त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। त्योहार आने के हफ्तों पहले से दुकानों में गुलाल और तरह तरह के रंग आ जाते हैं। रंगों का त्योहार होने के कारण इस दिल एक दूसरे को गुलाल अबीर लगाकर गले मिलने की प्रथा है। इससे भाईचारा और आपसी सौहार्द को बढ़ा मिलता है। लेकिन समय बदलने के साथ ही रंगों को खेलने के तौर तरीकों में भी वृद्धि आई है। तरह तरह के केमिकल युक्त कलर आज मार्केट में आने लगे हैं। जिसको लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि संभलकर अन रंगों का प्रयोग करें। 

 

बताते चलें कि किसी भी तरह से रंगो से होने वाले नुकसानों के कारण अब हर्बल और ऑर्गेनिक कलर की डिमांड बढ़ गई है। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जरूरी नहीं सभी कलर हर्बल और ऑर्गेनिक ही हों। इनमें केमिकल्स भी मिले हो सकते हैं। यह कलर शरीर में लगने पर आपको नुकसान भी पहुंचाएंगे। वहीं, दुकानदारों की बात करें तो उनका कहना है कि हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों की डिमांड बढ़ गई है। इसलिए यह रंग भारी मात्रा में लाना पड़ रहा है। 

सिंथेटिक रंग और ऑर्गेनिक रंग की चमक देखकर आप अंतर जान सकते हैं। हर्बल रंग तैयार करने के लिए पत्तियों को प्रयोग में लाया जाता है। सिंथेटिक रंगों का बेस सिलिका का होता है। साथ ही इन रंगों में जहरीले वैरिएंट मिले होते हैं। यह रंग यदि शरीर में लग जाए तो निशान पड़ जाते हैं और कई दिनों तक निशान जाते ही नहीं। अब तो कैप्सूल में भी कलर मिलने लगे हैं। जिनकी कीमत महज 20 रुपए है। एक कैप्सूल ही बाल्टी भर पानी के लिए पार्याप्त होता है। ऐसे में त्योहार पर रंग खेलने को लेकर आप सतर्कता जरूर बरतें। ताकि आपका त्योहार सिर्फ खुशियों में ही बीते। कहीं केमिकल युक्त कलर आपके लिए परेशानी का सबब नहीं बन जाए।

 

 

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