राम मंदिर निर्माण को लेकर अचानक गतिविधियां तेज  

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अयोध्या में संत फिर हुये सक्रिय

 

संजय राजन

अय़ोध्या। जैसे -जैसे देश चुनावी मोड में आता जा रहा है ,सूबे के लंबे अरसे से विवादित रामजन्म भूमि अय़ोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर गतिविधियां तेज होती जा रही है । पिछले छ: सात महीने से चाहे सुब्रमण्यम स्वामी की मुहिम की बात की जाये या फिर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी की या फिर बात की जाये संघ की अंदरखाने में चल रही राम मंदिर निर्माण के लिये कवायद की। मंदिर निर्माण को लेकर सूबे मे एक बार फिर माहौल गरमाता जा रहा है ।

राम मंदिर निर्माण को लेकर अयोध्या में साधु संतों की भी गतिविधि तेज होती नजर आने लगी है। आज अयोध्या मे मंदिर निर्माण को लेकर राम जन्मभूमि न्यास परिसद और विश्व हिंदू परिसद से जुड़े साधु संतों की एक अहम बैठक हुयी ।

 

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इस बैठक में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास समेत मंदिर निर्माण से सरोकार रखने वाले कई साधु संत मौजूद रहे । दरअसल इस बैठक को इस नजरिये से अहम माना जा रहा है कि पहली बार ऐसा हुआ है जब अयोध्या के सारे प्रभावशाली संतों ने मंदिर निर्माण को लेकर केन्द्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार को दो टूक अल्टीमेटम दे दिया है । 


बैठक में साफ तौर से मंदिर निर्माण को लेकर रणनीति पर विचार विमर्श के बाद ये फैसला लिया गया है कि अगर केन्द्र और प्रदेश सरकार साथ मिलकर राम का मंदिर नहीं बनाती तो साधु समाज एक बार फिर एक साथ बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर हो जायेगा । इस बैठक में नृत्य गोपाल दास ने पीएम मोदी और सीएम योगी पर निशाना साधते हुये पूछा  कि आखिर अब मंदिर निर्माण नहीं होगा तो कब होगा ? जबकि एक लंबे इंतजार के बाद केन्द्र और प्रदेश दोनों जगहों पर मंदिर निर्माण का दावा करने वाली बीजेपी की हीं सरकार है ।

 

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 राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने इसी के साथ सरकार को चेतावनी देते हुये कहा कि  उनके लिए कोई सरकार नहीं है, उनके लिए एक ही सरकार है, जो सबसे बड़ी है। वह उसी सरकार को मानते हैं जो कभी नहीं गिरती। लिहाजा संत अपनी आवाज दिल्ली तक पहुंचाएं और अगर सरकार नहीं सुनती तो साधु संत राम मंदिर निर्माण के लिए एक बार फिर आंदोलन करने के लिये तैयार रहें । मामला सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन सुप्रीम कोर्ट को प्रणाम करके राम मंदिर आंदोलन का काम शुरू किया जाये।

सीएम योगी के करीबी माने जाने वाले दिगंबर अखाडा के महंत सुरेश दास ने भी अयोध्या में मंदिर निर्माण का समर्थन करते हुये कहा कि खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नें भी केन्द्र सरकार और खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहले हीं बताया है कि बगैर राम मंदिर निर्माण के अयोध्या में सारा विकास का काम बेकार है ,इसलिय जितना जल्दी हो सके रास्ता निकालकर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाये ।

 

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हालांकि इन सबके बीच एक बात तो दीगर है कि बेशक साधु संत अब चुनावी माहौल में केन्द्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार पर दबाब बनाने की रणनीति में पूरी तरह से लग गये हैं ।मंदिर निर्माण के लिये संघर्ष करने वाली विश्व हिंदू परिसद से अलग होकर डा प्रवीण तोडगिया ने भी नये संगठन के जरिये आग उगलना शुरू कर दिया है । मामला सुप्रीम कोर्ट में होने से सरकार के भी हाथ बंधे हैं इसमें भी दो राय नहीं है लेकिन ये भी हकीकत है कि लोकसभा चुनाव के पहले अगर मंदिर निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम केन्द्र और प्रदेश सरकार की ओर से नहीं उठाया जाता तो बीजेपी के लिये साधु संतों को समझा पाना टेढी खीर साबित होगा ।

 

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