सुप्रीम कोर्ट की यूपी पुलिस को हिदायत, कहा-पत्रकार प्रशांत को तुरंत रिहा करे

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भारत के समाचार/ india news

नई दिल्ली। यूपी पुलिस अपने नित नए कारनामों को लेकर आए दिन सुर्खियों में बनी रहती है। सीएम योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी करने पर पत्रकार के खिलाफ हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज करते हुए पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पुलिस पत्रकार प्रशांत कनोजिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर लखनऊ लाई थी। यही नहीं पुलिस ने पत्रकार के खिलाफ खुद ही शिकायतकर्ता बनते हुए एफआईआर दर्ज कर दी थी। पुलिस की कार्यशैली पर सोशल मीडिया में सवाल उठने लगे। इसके बाद पत्रकार की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत याचिका डालते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मत अलग अलग हो सकते हैं। प्रशांत को शायद उस ट्वीट को प्रकाशित या लिखना नहीं चाहिए था लेकिन किस आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। यूपी सरकार उदारता दिखाते हुए प्रशांत को तत्काल रिहा करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्वतंत्रा से बड़ा कुछ भी नहीं है। किसी भी नागरिक के लिए स्वतंत्रता सर्वोपरि है। संविधान स्वतंत्रता की गारंटी सुनिश्चित करता है, इससे छेड़छाड़ की इजाजत किसी को नहीं है। गौरतलब है कि कनोजिया ने गत 6 जून को सीएम योगी के खिलाफ टिप्पणी की थी। इसके बाद सीएम कार्यायल से पुलिस अफसरों को कार्यवाही के निर्देश दिए गए। आनन फानन में एसएसपी ने कार्रवाई शुरू की। यहां तक कि क्राइम ब्रांच की टीम भी प्रशांत को पकड़ने में जुट गई। पुलिस ने थाने के उपनीरिक्षक को ही शिकायतकर्ता बनाकर पत्रकार प्रशांत को गिरफ्तार कर लिया। सीएम योगी को अपना प्रेमी बताती युवती मामले में टिप्पणी पर फंसे थे। उन्होंने टिप्पणी करते हुए लिखा था कि ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी।’

ये है पूरा मामला

बताते चलें कि पत्रकार प्रशांत को सीएम योगी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के साथ ही बदनाम करने वाला वीडियो शेयर करने का आरोप लगाते हुए पुलिस ने गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता भी कोई और नहीं पुलिस उपनिरीक्षक महोदय ही है। वह भी इसलिए कि सीएम कार्यालय से पत्रकार पर कार्यवाही के सख्त निर्देश दिए गए। गिरफ्तारी के विरूद्ध याचिका में कहा गया कि तत्काल सुनवाई की जरूरत है। पुलिस ने यह गिरफ्तारी अवैध तरीके से की है। इसलिए गिरफ्तारी पूरी तरह से ‘असंवैधानिक’ है। पत्रकार की पत्नी जिगीशा अरोरा ने गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डालते हुए न्याय की गुहार लगाई।

प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज राधारमण सिंह कहा कहना है कि पत्रकार प्रशांत ने सीएम योगी के खिलाफ ट्विटर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद सीएम कार्यालय से जुड़े अधिकारी तत्काल हरकत में आ गए। इसके बाद एसएसपी कलानिधि नैथानी को आदेश दिया गया कि जिस युवक ने सीएम के खिलाफ टिप्पणी की है, उस पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई किया जाए। सीएम कार्यालय से आदेश आते ही पुलिस अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए और  उप​निरीक्षक विकास कुमार खुद ही शिकायतकर्ता बनते हुए थाने में तहरीर दी। इसक बाद पत्रकार पर मामला दर्ज कर कारवाई शुरू कर दी गई। क्षेत्राधिकारी हजरतगंज के मुताबिक आरोपी की तलाश में साइबर सेल और थाने की पुलिस लगाई गई थी। इसके बाद पुलिस बिना किसी नियम कानून को पूरा किए सीएम कार्यालय का आदेश मिलते ही दिल्ली पहुंच गई और पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया।

पत्रकार की पत्नी का दावा है कि उनके पति को पुलिस ने सादे कपड़ों में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के समय उनके साथ ही थी। पत्नी ने बताया कि घर पर दो लोग सादे कपड़ों में पहुंच गए। दोनों ने ही खुद को हजरतगंज पुलिस का अधिकारी बताते हुए कनोजिया को गिरफ्तार कर लिया। पत्नी का आरोप है कि उन्हें गिरफ्तारी वारंट भी पुलिस वालों ने नहीं दिखाया। यह कहां का नियम है कि पुलिस जब जिसे जैसे चाहे उसके घर से उठा ले जाए। कोई संविधान नियम और कानून रह गया है या नहीं। एक युवती का वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वह सीएम कार्यालय के बाहर खुद को सीएम की प्रेमिका बता रही थी। प्रशांत कनोजिया ने उसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सीएम योगी के खिलाफ टिप्पणी की थी। वीडियो करीब 95 हजार बार लोगों ने देखा। यही नहीं करीब चार हजार लाइक और 15 सौ से अधिक रीट्वीट्स भी आए।

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