स्वच्छता अभियान को लेकर मोदी सरकार की नई पहल

Foto

भारत के समाचार/ NATIONAL NEWS

आवास एवं शहरी मंत्रालय ने किया टेक्नोलॉजी चैलेंज का शुभारंभ

 

नई दिल्ली। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए टेक्नोलॉजी चैलेंज का शुभारंभ किया है। इसके जरिए सेप्टिक टैंक, मेनहोल इत्यादि में मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करना है। बता दें कि यह पीएम नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप है जिन्होंने 4 मई, 2018 को अपनी अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में सीवर और सेप्टिक टैंकों में मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करने की मंशा जताई थी।

 

ये भी पढ़ें- ‘भारत की बेशकीमती संपदा है सीमावर्ती जनसंख्या’

 

आवास एवं शहरी मामलों में मंत्रालय ने यह जिम्मेदारी मिलने के बाद अब टेक्नोलॉजी चैलेंज सीवरेज प्रणालियों और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए उपयुक्त समाधानों की पहचान करने का निर्णय लिया है।  यह चैलेंज महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन का एक हिस्सा होगा, जिसका आयोजन 2 अक्टूबर 2018 को किया जाएगा।

सीवर ड्रेन और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए उनमें मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करना इस पहल का अंतिम लक्ष्य है। भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए उनमें मानव प्रवेश की जरूरत को समाप्त करने में मददगार अभिनव प्रौद्योगिकियों को उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।

 

ये भी पढ़ें- WTO में भारत ने चीन को चेताया...

 

बता दें कि टेक्नोलॉजी चैलेंज का उद्देश्य अभिनव तकनीक एवं व्यवसायिक प्रक्रियाओं की पहचान करना। ऐसे व्यवसायिक मॉडल का अनुमोदन करना जो विभिन्न आकार, भौगोलिक स्थिति एवं श्रेणी वाले शहरों के लिए उपयुक्त हो। परियोजनाओं से जुड़े चुनिंदा शहरों में चयनित प्रौद्योगिक/ समाधानों का प्रायोगिक परीक्षण करना एवं उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना। 

तो सवाल ये उठता है कि आखिर इस पूरी प्रक्रिया का आकलन कैसे होगा, बता दें कि इसमें भाग लेने वालों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले तकनीकी समाधानों के आकलन एवं परीक्षण के लिए एक ज्यूरी का गठन किया जाएगा, जिसमें आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के विशेषज्ञ, आईआईटी/ आईआईएम की फैकल्टी और अग्रणी सिविल सोसायटी समूहों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

 

ये भी पढ़ें- मोदी मैजिक का कमाल...  दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत

 

वहीं मैनुअल स्केवेंजर्स से जुड़े संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रस्ताव के बारे में संदेह जाहिर किया है। सीवर और सेप्टिक टैंकों को साफ करने वाली मशीनें पहले से ही वैश्विक स्तर पर उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें भारतीय परिस्थितियों में अनुकूलित करने की जरूरत है और सरकार को बड़े पैमाने पर जमीन पर तकनीक का उपयोग करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत है।

 

ये भी पढ़ें- इंटनेट की आजादी बनी रहेगा... नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों को मिली मंजूरी

 

विडंबना यह है कि जब मैनुअल स्केवेंजर की मौत हो जाती है तो सरकार मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेती है लेकिन ऐसी मौतों को रोकने के लिए कोई समुचित उपाय नहीं करती है। कानून द्वारा अनिवार्य उपकरण और चिकित्सा सहायता न तो ठेकेदार और न ही नगर पालिका द्वारा प्रदान किया जाता है। इसके समाधान हेतु प्रौद्योगिकी पर विचार करने के पूर्व हमें कानून के प्रावधानों को लागू करने की आवश्यकता है। अन्यथा ये सभी नवाचार जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम नहीं दे पाएंगे।

 

 

leave a reply

भारत के समाचार

Live: ख़बरें सबसे तेज़

प्रमुख श्रेणी