नेशनल यूथ डे : 'रीढ़ की हड्डी है देश का युवा'

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National News / राष्ट्रीय समाचार

नई दिल्ली। 'जिस तरह अलग-अलग जगहों से निकली नदियां, अलग-अलग रास्तों से होकर आखिरकार समुद्र में मिल जाती है, ठीक उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा से अलग-अलग रास्ते चुनता है। ये रास्ते देखने में भले ही अलग-अलग लगते हैं लेकिन सभी ईश्वर तक ही जाते हैं।' ये उस भाषण का अंश है जिसने पूरी ​दुनिया के सामने भारत को एक मजबूत छवि के साथ पेश किया। 

12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे नरेंद्र नाथ ने जब अमेरिका के शिकागों की धर्म संसद में यह भाषण दिया तो पूरी दुनिया को भारत को एक नए नजरियें से देखा। ये वहीं नरेंद्र नाथ ही जिन्हें हम और आप स्वामी विवेकानंद के नाम से जानते है।

स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को 'राष्ट्रीय ​युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है ताकि देश के युवा स्वामी विवेकानंद के जीवन, कार्य शैली, आदर्श और चेतना से प्रेरणा ले सकें। स्वामी का मानना था कि 'जब तक देश की ​रीढ़ युवा अशिक्षित रहेंगे तब तक देश को उन्नति की ओर ले जाना असंभव होगा।'

उन्होंने अपनी ओजपूर्ण वाणी से सोए हुए युवकों को जगाने का काम शुरू कर दिया। स्वामी ने साल 1897 में मद्रास में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था, 'मेरी आशाएं युवाओं पर टिकी हुई है।'

स्वामी विवेकानंद ने पश्चिमी सभ्यता को भारत के योग और वेदांत से परिचित कराया। जब 11 सितंबर 1893 को शिकागो में विवेकानंद ने हिंदू धर्म पर प्रभावी भाषण दिया तो इसके बाद से स्वामी विवेकानंद को 'Messenger of Indian wisdom to the Western world' कहा जाने लगा।

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