ट्रिपल तलाक पर मोदी सरकार के फैसले को ओवैसी ने बताया असंवैधानिक

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National News / राष्ट्रीय समाचार

नई दिल्ली। तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश को AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने असंवैधानिक करार दिया। साथ ही उन्होंने महिला संगठनों से इसका विरोध करने की अपील की।  
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह अध्यादेश मुस्लिम महिलाओं के​ खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश मुस्लिम महिलाओं को किसी तरह का न्याय नहीं देगा। ओवैसी का कहना है कि इस्लाम में विवाह एक सामाजिक अनुबंध है। इसे दंड प्रावधान के अंतगर्त लाना सरासर गलत है।

ओवैसी ने तीन तलाक मामले पर कहा कि यह अध्यादेश असंवैधानिक है। ओवैसी के मुताबिक यह अध्यादेश संविधान के समानता के ​अधिकार के खिलाफ है। इसे केवल मुसलमानों के लिए बनाया जा रहा है। अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और महिला संगठनों को सर्वोच्च न्यायालय में इस अध्यादेश के खिलाफ चुनौती देनी चाहिए। 

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अध्यादेश की बात करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने सीधे प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कानून उन शादीशुदा महिलाओं के लिए भी लाया जाए जिनके ​पति शपथ पत्र में यह कहते हैं कि वह शादी शुदा है लेकिन उनकी पत्नी उनके साथ नहीं रहती है। देश में ऐसी करीब 24 लाख महिलाएं है।

तीन तलाक पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बुधवार (19 सितंबर) को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन तलाक अध्यादेश को मंजूरी मिल गई है। अब बहुत जल्द मोदी सरकार तीन तलाक पर अध्यादेश लाएगी। संसद के मॉनसून सत्र में इस बिल पेश किया गया था लेकिन उस समय इसे मंजूरी नहीं मिल पाई थी। बता दें कि तीन तलाक को लोकसभा से मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल यह बिल राज्यसभा में लंबित है।

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केंद्र सरकार तीन तलाक के मुद्दे पर काफी आक्रामक रही है। सरकार की तरफ से इसके लिए बिल भी पेश किया गया था। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के विरोध के बाद इस बिल में संशोधन किया गया था। संशोधन के बाद भी राज्यसभा में बिल पास नहीं हो पाया था। तीन तलाक बिल इससे पहले बजट सत्र और मॉनसून सत्र में पेश किया गया था। 

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