शूरवीरों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर लहराया था तिरंगा...

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लखनऊ। ' जो भरा नहीं है भावों से बहती जिस में रसधार नहीं ह्दय नही वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नही'। आज कि तिथि भारतीयों के लिए गर्व से सर ऊंचा करने का दिन है। आज के ही दिन भारत के सपूतों ने पाक के नापाक इरादों को निस्तेनाबूद कर दिया था। कारगिल का नाम आते है रगों का खून दोगुनी तेजी से दौड़ने लगता है। कारगिल के युद्ध में भारत के शूरवीरों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर तिरंगा लहरा कर ये साबित कर दिया था कि भारत में वीरों की कमी नहीं है।

 

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भारतीय जवानों ने वर्ष 1999 में अपनी जान की बाजी लगाकर पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा था। शरीर गलाने वाली बर्फ के बीच रणबांकुरों के शौर्य के सामने पाकिस्तानी घुसपैठिये टिक नहीं पाए। कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के वीरों ने अपने अदम्य साहस की जो इबारत लिखी वह भारतीय सेना के इतिहास का गौरवशाली हिस्सा है। कारगिल में टोलोलिंग पर्वत चोटी से लेकर द्रास सेक्टर तक दुश्मनों को जड़ से उखाड़ने में उत्तराखंड के वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी।

 

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2 राजपूताना रायफ ल के मेजर विवेक गुप्ता के नेतृत्व में 12 जून की रात को टोलोलिंग चोटी को फतह के लिए कंपनी रवाना हुई। ऊंचाई पर बैठे दुश्मन ने हमला किया, जिसमें मेजर गुप्ता को दो गोलियां लगीं, लेकिन घायल होने के बावजूद मेजर गुप्ता ने तीन दुश्मनों को ढेर कर बंकर पर कब्जा किया। मेजर गुप्ता को मरणोंपरांत युद्ध में दूसरा सर्वश्रेष्ठ वीरता पदक महावीर चक्र से अलंकृत किया गया।

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