वर्कफोर्स के मामले में महिलाओं की घटी संख्या

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नई दिल्ली। कार्यबल में महिलाओं की तेजी से गिरावट के बाद नियोक्ताओं द्वारा अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार दिलाने के उद्देश्य से श्रम मंत्रालय ने प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (PMRPY) को वर्तमान तीन साल से बढ़ाकर पांच वर्ष जारी रखने की योजना बनाई है। छोटे एवं मध्यम उद्यमों के साथ-साथ सूक्ष्म व्यवसायों को और अधिक महिलाओं को कार्य पर रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस संदर्भ में सरकार द्वारा नई प्रतिभाओं को शामिल करने वाले नियोक्ताओं को कर्मचारियों को दिये जाने वाले पेंशन और भविष्य निधि के लिए 12 प्रतिशत का योगदान दिया जाता है।

 

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वर्तमान में नियोक्ताओं के लिए सब्सिडी तीन वर्ष के लिए है जो अगस्त 2016 में लांच की गई थी। इसके अंतर्गत 15 हजार रुपए मासिक वेतन के साथ अप्रैल 2016 से योगदान करने वाले सभी कुशल और अकुशल श्रमिक शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 5 जुलाई तक, 61.12 लाख कर्मचारियों को पीएमआरपीवाई के तहत नामांकित किया गया है। इसे महिलाओं के लिए और दो वर्ष तक विस्तारित किए जाने के लिए 25 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होने का शुरुआती अनुमान लगाया गया है।

 

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पुरुषों और महिलाओं दोनों की भर्ती के लिए मौजूदा तीन साल की योजना हेतु लगभग 18 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जिसमें 10,600 करोड़ रुपए केंद्रीय बजट के हिस्से के रूप में शामिल है। भारत की महिला कार्यबल भागीदारी दर दक्षिण एशिया में सबसे कम है। 2018 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार महिलाओं का रोजगार 2005-2006 में 36 प्रतिशत से घटकर 24 प्रतिशत रह गया है।

 

 

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