विश्व एड्स दिवस : इस लड़ाई में खुद को अकेला न समझे!

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National News / राष्ट्रीय समाचार

नई दिल्ली। 1 दिसंबर यानि आज विश्व एड्स दिवस है। यह एचआईवी से संगठित होकर लड़ने, एचआईवी पीड़ित लोगों के साथ सहानुभूति और एचआईवी एड्स जैसी बीमारी से मरने वालों के प्रति श्रद्धांजलि देने का दिन है। एड्स बहुत ही खतरनाक बीमारी है जिससे लगभग साढ़े तीन लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

साल 2018 में वर्ल्ड एड्स डे की थीम है 'अपनी स्थिति को जानें'। इसका मतलब है कि हर इंसान को अपने एचआईवी स्टेटस की जानकारी होनी चाहिए। एड्स वर्तमान समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।

1988 में पहली बार पूरी दुनिया के लोगों ने इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए 1 दिसंबर को चुना। तब से हर साल इस दिन एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ जो लोग इससे जूझ रहे हैं उनमें आत्मविश्वास पैदा करने की कोशिश की जाती है ताकि वो इस लड़ाई में खुद को अकेला न समझे। 

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इस बीमारी का पहला मामला 1981 में आया था और आज ये बीमारी एक विकराल रूप धारण कर चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक 39 मिलियन लोग इस बीमारी का शिकार हो चुके हैं। 2013 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक दुनियाभार में करीब 35 मिलियन लोग एचआईवी एड्स के शिकार थे जिनमें बच्चों की संख्या 3.2 मिलियन थी।

इस ​बीमारी को करीब चार दशक का समय ​बीतने को है लेकिन यह दुखद है कि इतने लंबे अर्से के बाद भी इसका कोई इलाज नहीं मिल सका है। सालों से इसे लेकर ​खोज और रिसर्च जारी है लेकिन फिर भी यह बीमारी लाइलाज है।

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