पिक्चर अभी बाकी है भाई!!!

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मेहमानो की कलम से, From the pen of guests

 

"युद्ध जीतने के लिए आपको एक लड़ाई हारनी होती है "आप क्या सोचते है,आपने बेईमानी करके लूट लिया? कतई नही।दो हारे हुए दुश्मन हाथ मिलाकर, तिकड़म भिड़ा कर, ,क्या जीत गए हैं ? कतई नही। गाली गलौच करिये, प्रधान मंत्री, राज्यपाल को गाली दीजिये,, शैतानी जश्न मनाइए, और आगे आगे देखिए, होता है क्या?

कल कुमारस्वामी शपथ लेंगे, फिर बहुमत के लिए समय मिलेगा और फिर मैच यही पर आकर अटक जाएगा।अभी से ही झगड़ा शुरू हो चुका है। ये कतई मत समझिए कि ये बहुमत 100% हासिल कर ही लेंगे, लिंगायत का मुद्दा भी अभी जिंदा है,दो दुश्मन आपस में न लड़े संभव ही नही है। 

और अगर कुछ विधायक अलग हो गए, तो आप भी नही सिद्ध कर पाएंगे बहुमत,,अभी कुछ भी निश्चित नही है, कई संभावनाएं हैं। अभी तो बॉल आपके पाले में डाल दी है लेकिन आप बहुत ज्यादा "स्टिकी विकेट" पर हैं, आप खड़े तक नही रह सकते है, खेलना तो दूर।"जनता के नकारने के बाद", आप चाहे कुछ भी कर लें, आप राजनीति में टिक ही नही सकते।

डॉ आर के वर्मा (देव)

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मेहमानों की कलम से

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