रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 कर दी, जिससे मैं कतई सहमत नही हूँ

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मेहमानो की कलम से, From the pen of guests

आज योगी सरकार ने मध्यम श्रेणी के सरकारी कर्मचारियो की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 कर दी, जिससे मैं कतई सहमत नही हूँ। और एक और प्रावधान जोड़ दिया कि 60 की उम्र में समीक्षा करने के बाद ही 62 की जाएगी यानी कि भ्रस्टाचार व लाल फीता शाही का स्कोप।

पहला तर्क यह है कि इस देश मे 65 % आबादी 35 साल के नीचे है, यदि आप मात्र 2 साल रिटायरमेंट ऐज बढ़ाते है तो समय अंतराल होता जाएगा और युवा नौकरियों से महरूम होते जाएंगे। 

और उधर 2 साल नौकरी और बढ़ा देने से उन सीनियर को फायदा न होकर और नुकसान होगा क्योंकि वो उसके बाद और भी कुछ काम करने योग्य नही रह जाएंगे और क्वालिटी ऑफ लाइफ बदतर हो जाएगी।

कुछ प्रोफेशन हैं जिनमे अनुभव बहुत आवश्यक होता है और व्यक्ति उम्र के साथ बेहतर होता जाता है जैसे कि डॉक्टर, अध्यापक,जज,व पॉलिटिशियन। और इन 4 केटेगरी में बहुत कम लोग भी होते है, इसलिए इन प्रोफेशन्स मे रिटायरमेंट की उम्र हमेशा ज्यादा होनी चाहिए।

और इससे किसी को कोई ऐतराज भी नही है।परंतु, सरकारी नौकरियो में तो "रिटायरमेंट की उम्र तो और कम करनी चाहिए", ताकि नए युवाओं को अवसर मिले जो बेहतर काम कर सके, और सामाजिक संतुलन भी बना रहे।

दरअसल जब रिटायरमेंट ऐज 60 बनाई गई थी तब व्यक्ति 65 साल तक ज्यादातर ज़िंदा रहता था, लिहाज़ा 5-6 साल पोस्ट रिटायरमेंट में बिता कर दुनिया से विदा हो जाता था लेकिन अब 80 -90 की उम्र तक व्यक्ति सही रहता है,तो रिटायरमेंट के बाद काफी लंबे समय तक वो कार्यहीनता में बीताता है।

यदि उसे और जल्दी रिटायर कर दिया जाए, तो पेंशन के साथ कुछ नया काम करेगा तो उसका जीवन भी बेहतर होगा और युवाओं को नौकरी भी मिलेगी।
मेरा तो सुझाव है कि सरकारी नौकरी एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत 20 साल के लिए मिलनी चाहिए, 

ताकि व्यक्ति नौकरी के दौरान भी क्षमतापूर्वक कार्य करे, और उसके आगे की योजना की भी प्लानिंग कर ले, क्योकि तब तक उसका युवा जोश थोड़ा बरकरार रहेगा जिससे वो नया काम करके जीवन की दूसरी इनिंग बेहतर जी सकेगा, वर्ना रिटायरमेंट के बाद के वर्ष वे सिर्फ घर पर निष्क्रिय बैठ कर बीमारी से जूझते हैं, और व्याधियों के शिकार होते है।

डॉ आर के वर्मा (देव)

 

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