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4 साल मोदी सरकार के पूरे होने पर आप क्या सोचते है ? 

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मेहमानो की कलम से 

इसके लिए आपको ध्यान मग्न होकर आत्मा की आवाज़ सुननी होगी और साथ ही आपको पिछले कई दशकों की राजनीति के बारे में निष्पक्ष होकर सोचना होगा। साथ ही चिंतन करके मूल भावना और निचोड़ को समझना होगा।

कुछ गिनाने से कोई फायदा नही, क्या हुआ क्या नही, इस पर भी बहस किसी नतीजे पर नही पहुचेगी। बस ये सोचिये, कि पिछले 4 सालों में आपका व आपके आस पास गरीबो का आत्मविश्वास बढ़ा है या नही ?

सोचिये, की, क्या राजनीति की परिभाषा बदली या नही ? क्या भ्रस्टाचार, परिवारवाद,व बेईमानी से बात, नेक इरादों, दृढ़ विश्वास, कड़ी मेहनत,और पारदर्शिता की ओर बढ़ी या नही ?

क्या गरीबो, ग्रामीणों, दलितों, व वंचितों तक सरकार पहुची या सिर्फ उनका वोट के लिए इस्तेमाल हुआ जो अब तक होता आया था? क्या हर योजना व नीति में तुष्टिकरण की राजनीति खत्म होकर सबका साथ और सबका विकास की नीति अपनाई गई या नही? 

क्या भाई भतीजावाद, शिफारिश की संस्कृति,माफिया गिरी, मनी व बाहुबल  राजनीति से हटी या नही ? क्या फोकस ऑफ गवर्नेन्स , सब्सिडी (भीख) देने के बजाय सशक्तिकरण, विकास,टेक्नोलॉजी व एनर्जी पर आया या नही ?

मुझे लगता है सिर्फ इन बातों के उत्तर ढूंढने के साथ साथ,खुद अपने आप को देखे और चीजों को करने में आसानी के बारे में सोचे, तो ऐसा हो ही नही सकता कि आपको सही उत्तर न मिले,, और हाँ, एक बार किसी एक गांव या शहर की गरीब बस्ती का भ्रमण करके किसी परिवार से भी ये प्रश्न सरल भाषा मे पूछ लें,, आपको सारे उत्तर मिल जाएंगे।

डॉ आर के वर्मा (देव)

 

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