उनका धर्म सिर्फ देश है, न हिन्दू न मुस्लिम 

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मेहमानो की कलम से 

कांग्रेसियो ने प्रणब मुखर्जी को एक किनारे कर दिया  कारण ,वे 7 जून को आरएसएस की सभा मे मुख्य अतिथि बनकर जाएंगे। और कहने की जरूरत नही की राष्ट्रवाद के प्रतीक 'आरएसएस ' को, और देशद्रोह को बढ़ावा देने वाली कांग्रेस बर्दाश्त नही कर सकती, लिहाज़ा प्रणब मुखर्जी की बेइज़्ज़ती तो करनी ही है।

सबको मालूम है कि आरएसएस की सभाओं में गांधी, नेहरू, अम्बेडकर, राजेन्द्र प्रसाद, से लेकर आधुनिक युग मे सभी, मेहमान बनकर गए है,और नेहरू तो चीन से हारने के बाद आरएसएस की एक तरह से शरण मे चले गए थे।

जिन लोगो को नही मालूम है उनको जानना चाहिये,कि आरएसएस एक ऐसा संगठन  है, जहां निःस्वार्थ भाव से देशहित में काम होता है,,किसी धर्म या राजनैतिक पार्टियों की खिलाफत या पक्षपात नही किया जाता है (1984 में आरएसएस ने राजीव गांधी व कांग्रेस को भी सपोर्ट किया था),

सरस्वती शिशु मंदिर में 60000 मुस्लिम छात्र पढ़ते है जहाँ उन्हें कोई धार्मिक शिक्षा नही दी जाती है, अनुसूचित जातियों के उत्थान के लिए सर्व संघ विद्यालय,अनुसूचित जन जातियों के लिए एकल विद्यालय, व हर राष्ट्रीय समस्या व आपदा के प्रबंधन अलग से टीमें गठित है।

घर भार छोड़कर, दो वक्त की मुश्किल से रोटी, लकड़ी की कुर्सी व तखत पर जीवन , खुद कपड़े धोकर, एक झोले में ज़िंदगी बिताना , ये है उनका जीवन। किसी राजनेता व व्यवसायी से चंदा न लेकर, छोटे छोटे निःस्वार्थ भाव से दिए चंदे से काम चलाना, कही कोई प्रचार नही, सिर्फ संस्कार, त्याग, अनुशाशन, मर्यादा और मानवता।

अभी हाल ही में काश्मीर में 57 बच्चों को आरएसएस ने गोद लिया है जो आतंकीयो का शिकार हुए परिवारों के थे और इनमे से 38 बच्चे मुस्लिम है , ऐसी भावना व मानवता देश वासियो को सिर्फ आरएसएस से सीखनी चाहिए।

लेकिन आरएसएस, कांग्रेस की वोटबैंक व तुष्टिकरण की नीति के सख्त खिलाफ है जिसके कारण कई लोग आरएसएस के दुश्मन हैं, और हिंदूवादी या ब्राह्मणवादी कहकर बदनाम करते हैं  जबकि आरएसएस में सारी जातियां व समानांतर संस्था में मुस्लिम की भी बहुतायत में संख्या है,

और वे जातिवाद में यकीन ही नही करते (ज्यादातर लोग अपना सरनेम तक हटा देते हैं), और जातिविहीन, राष्ट्रीयता व मानवता को धर्म मानते है। अभी हाल ही में मेरठ सभा मे लाखो स्वयंसेवकों ने मुस्लिम व दलितों के घरों से आये भोजन पैकेटों का इस्तेमाल किया था।

कांग्रेस की तुष्टिकरण व डिवाइड व रूल की पालिसी के कारण ही पाकिस्तान टेरर कैपिटल बन चुका है और आरएसएस के प्रयासों द्वारा ही भारत बौद्धिक कैपिटल बन गया है। आरएसएस कभी भी स्वयं आगे आकर किसी बदनामी का खंडन न करके, धैर्यपूर्वक हृदय परिवर्तन करने में विश्वास करती है।

डॉ आर के वर्मा (देव)

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