पंचांग ( Panchang ), रविवार का पंचांग ( Ravivar Ka Panchang), आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

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पंचांग | Panchang | रविवार का पंचांग | Raviwar Ka Panchang | आज का पंचांग | Aaj Ka Panchang |

 

हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है।  मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। 

Panchang, पंचाग, ( हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:-  तिथि (Tithi) 2:-  वार (Day) 3:-  नक्षत्र (Nakshatra) 4:-  योग (Yog) 5:-  करण (Karan)

शास्त्रों के अनुसार पंचाग (panchang) को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) को सुनते थे । जानिए रविवार का पंचांग (Ravivar Ka Panchang) आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)। 

रविवार का पंचांग ( Raviwar Ka Panchang)
 

13 जनवरी 2018 का पंचांग :- 

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर

शक संवत - 1940

अयन - उत्तरायण

ऋतु - शरद ऋतु

मास - पौष माह

पक्ष - शुक्ल पक्ष

तिथि (Tithi) :-  सप्तमी 23:42 तक तदुपरांत अष्टमी ।

तिथि का स्वामी - सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्यदेव जी है तथा अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी है ।

लोहड़ी पंजाबियों का बहुत बड़ा त्यौहार है जो बहुत सारी खुशी और उळास के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व परिवार के सभी सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों को एक साथ एक ही स्थान पर लाता है। लोग इस दिन आलाव जलाते है, तब गाना गाते है और उस के चारो ओर नाचते है। इस दिन लोग आपस में मिलकर आलाव जलाकर अग्नि देव की पूजा करते हुए उसके चारो ओर नाचते गाते समय रेवडी, तिल , पॉपकॉर्न, गुड आदि चीज़ें आग मे डालते है। और अग्नि देव से अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते है। इस दिन सभी लोग सुन्दर और रंग बिरंगे कपडे पहनते है और ढोल की थाप पर भांगड़ा(गिद्दा) करते है। यह प्रसिद्ध पर्व किसानों के लिए बहुत महत्व रखता है।लोहडी का त्योहार किसानों के लिए एक नयी समृद्धशाली शुरुआत का प्रतीक है। लोहडी का त्यौहार नविवाहित जोडे और घर मे जन्मे पहले बच्चे के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 
सप्तमी के दिन मीठा भोजन या फलाहार करने भोजन में नमक का सेवन ना करने से सूर्य भगवान प्रसन्न होते हैं ।

रविवार को अदरक और मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। 

वार :- रविवार 

नक्षत्र (Nakshatra) :- उत्तरा भाद्रपद 11:07 तक तदुपरांत रेवती

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य (नाम का सूर्य ) है एवं रेवती नक्षत्र के देवता पूषा (पूषण नाम का सूर्य ) है ।

योग (Yog) -  परिघ 07:37 तक

प्रथम करण : - गर 10:58 तक

द्वितीय करण : - वणिज 23:42 तक

गुलिक काल : - अपराह्न - 3:00 से 4:30 तक । 

राहुकाल :- रविवार को राहुकाल सायं - 4:30 से 6:00  तक । राहुकाल में कोई भी नया शुभ कार्य एवं यात्रा नहीं करनी चाहिए। 

दिशाशूल (Dishashool)-  रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । इस दिन यात्रा में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।

विशेष - सप्तमी को ताड़ का सेवन नहीं करना चाहिए ।

पर्व त्यौहार -  

मुहूर्त -   सप्तमी तिथि को यात्रा , शिल्प , चूड़ा कर्म, अन्नप्राशन व गृह प्रवेश शुभ है।

सूर्योदय :-  प्रातः 07:02 ।

सूर्यास्त :-   सायं  05:22 ।

 

नोट :- पंचांग ( Panchang ) को नित्य पढ़ने से सभी देवता प्रसन्न रहते है, जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराके पुण्य भी अर्जित करना चाहिए । 

 

 

 

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