पंचांग ( Panchang ), शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang), आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

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पंचांग (Panchang), शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang), आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

 

हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है।  मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। 
Panchang, पंचाग, ( हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:-  तिथि (Tithi) 2:-  वार (Day) 3:-  नक्षत्र (Nakshatra) 4:-  योग (Yog) 5:-  करण (Karan)

शास्त्रों के अनुसार पंचाग (panchang) को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) को सुनते थे । जानिए शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang) आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)। 
 

पंचांग (Panchang), शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang)

8 दिसम्बर 2018 का पंचांग :- 

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर

शक संवत - 1940

अयन - दक्षिणायण

ऋतु - शरद ऋतु

मास - मार्गशीर्ष (अगहन) माह

पक्ष -  शुक्ल पक्ष

तिथि (Tithi) :- प्रतिपदा - 13:59 तक तदुपरांत द्वितीया ।

तिथि का स्वामी -  प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव है तथा द्वितीया तिथि के स्वामी ब्रह्म देव है ।

आज प्रतिपदा है । प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव हैं। अग्नि देव इस पृथ्वी पर साक्षात् देवता हैं, देवताओं में सर्वप्रथम अग्निदेव की उत्पत्ति हुई थी । ऋग्वेद का प्रथम मंत्र एवं प्रथम शब्द अग्निदेव की आराधना से ही प्रारम्भ होता है। हिन्दू धर्म ग्रंथो में देवताओं में प्रथम स्थान अग्नि देव का ही दिया गया है।
अग्निदेव सब देवताओं के मुख हैं और यज्ञ में इन्हीं के द्वारा देवताओं को समस्त यज्ञ-वस्तु प्राप्त होती है। अग्नि देव की पत्नी का नाम स्वाहा हैं। अग्निदेव की पत्नी स्वाहा के पावक, पवमान और शुचि नामक तीन पुत्र और पुत्र-पौत्रों की संख्या उनंचास है ।

वार :- शनिवार 

नक्षत्र (Nakshatra) :- मूल - पूर्ण रात्रि तक तदुपरांत पूर्वाषाढ़ा

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :- मूल नक्षत्र के देवता निर्रुती (राक्षस) है एवं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता जल देवता है ।

योग(Yog) -  शूल - 20:58 तक तदुपरांत गण्ड

प्रथम करण : - बव - 13:59 तक

द्वितीय करण : - बालव - रात्रि 02:46 तक

गुलिक काल : - गुलिक काल  (शुभ समय )  सुबह 6:00 से 7.30 बजे तक ।

राहुकाल :- शनिवार को राहुकाल सुबह 9:00 से 10:30 तक। राहुकाल में कोई भी नया शुभ कार्य एवं यात्रा नहीं करनी चाहिए। 

दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है । सफलता के लिए घर से अदरक या घी खाकर जाएँ ।

विशेष -  प्रतिपदा तिथि को कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए ।

पर्व त्यौहार- 

मुहूर्त (Muhurt) - प्रतिपदा तिथि को विवाह, यात्रा, व्रतबंध, प्राण प्रतिष्ठा, चूड़ा कर्म, वास्तु कर्म, गृह प्रवेश आदि मंगल कार्य बिलकुल भी नहीं करने चाहिए।

सूर्योदय :- प्रातः 06:55

सूर्यास्त :- सायं 05:36

नोट :- पंचांग ( Panchang ) को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए । 
 

 

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पंचाग, Panchang

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