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पंचांग ( Panchang ), शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang), आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

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पंचांग (Panchang), शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang), आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)

 

 

हिन्दू धर्म में पंचाग को बहुत ही शुभ माना जाता है।  मान्यता है कि नित्य पंचाग को पढ़ने वाले जातक को देवताओं का आशीर्वाद मिलता है उसको इस लोक में सभी सुख और कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। 
Panchang, पंचाग, ( हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:-  तिथि (Tithi) 2:-  वार (Day) 3:-  नक्षत्र (Nakshatra) 4:-  योग (Yog) 5:-  करण (Karan)

शास्त्रों के अनुसार पंचाग (panchang) को पढ़ना सुनना बहुत शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) को सुनते थे । जानिए शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang) आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)। 
 

पंचांग (Panchang), शनिवार का पंचांग ( Shaniwar Ka Panchang)

11 अगस्त  2018 का पंचांग :- 

विक्रम संवत् 2075 संवत्सर

शक संवत - 1940

अयन - उत्तरायण

ऋतु - ग्रीष्म ऋतु

मास - श्रावण (सावन) माह

पक्ष -  कृष्ण पक्ष

तिथि (Tithi) :-  अमावस्या - 15:27 तक तदुपरान्त प्रतिपदा ।

तिथि का स्वामी -  अमावस्या तिथि के स्वामी पित्रदेव है तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव है ।

आज वर्ष 2018 का तीसरा एवं आखिरी सूर्य ग्रहण है यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजे खत्‍म होगा । इस ग्रहणकाल का सूतक लगभग 12 घंटे पहले लगेगा । ज्योतिष के अनुसार इस बार के ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

आज शनि अमावस्या भी है । शनि अमावस्या वाले दिन शनि देव का विशेष पूजन, अर्चन और स्तवन करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनिदोष है वो लोग इस दिन विधि विधान के अनुसार पूजन करके उससे मुक्ति पा सकते हैं।

हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है । इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।

वार :- शनिवार 

नक्षत्र (Nakshatra) :- अश्लेशा - 24:05 तक तदुपरान्त मघा ।

नक्षत्र के देवता एवं ग्रह्स्वामी :- अश्लेशा नक्षत्र के देवता भगवान सूर्य देव हैं एवं मघा नक्षत्र के देवता पितर देव हैं ।

योग(Yog) -  व्यतीपात - 11:45 तक तदुपरांत वरीयान ।

प्रथम करण : -  नाग - 15:27 तक ।

द्वितीय करण : - किंस्तुघ्न - रात्रि 01:39 तक ।

गुलिक काल : - गुलिक काल  (शुभ समय )  सुबह 6:00 से 7.30 बजे तक ।

राहुकाल :- शनिवार को राहुकाल सुबह 9:00 से 10:30 तक। राहुकाल में कोई भी नया शुभ कार्य एवं यात्रा नहीं करनी चाहिए। 

दिशाशूल (Dishashool)- शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है । सफलता के लिए घर से अदरक या घी खाकर जाएँ ।

विशेष -  अमावस्या के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना मना है ।

मुहूर्त (Muhurt) - अमावस्या को पितृ कार्य और शल्य क्रिया करके उनमे सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

सूर्योदय :- प्रातः 05:47

सूर्यास्त :- सायं 06:50

नोट :- पंचांग ( Panchang ) को नित्य पढ़ने से जीवन से विघ्न दूर होते है, कुंडली के ग्रह भी शुभ फल देने लगते है। अत: सभी जातको को नित्य पंचाग को अनिवार्य रूप से पढ़ना ही चाहिए और अपने इष्ट मित्रो को भी इससे अवगत कराना चाहिए । 
 

 

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पंचाग, Panchang

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