केजरीवाल का शासन बना नए कीर्तिमानों का गवाह

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Political News / राजनीति के समाचार


नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में आम आदमी पार्टी ने ​जिस तरह दिल्ली फतह करके इतिहास रचा था, वैसे ही कई ​नए रिकार्ड अरविंद केजरीवाल के शासन में भी सामने आ रहे हैं। ये ऐसे रिकार्ड हैं जिनसे भारत की जनता पहली बार रूबरू हो रही है। आपको याद होगा लोकपाल बिल को लेकर अन्ना हजारे के आंदोलन के शोलों से चिंगारी ले अरविंद केजरीवाल सामाजिक कार्यकर्ता से नेता बने।

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उसी चिंगारी से उन्होंने दिल्लीवासियों के दिलों में ऐसी आग पैदा की कि वे सीधे दिल्ली के सिंघासन पर पहुंच गए। कुछ ही महीनों बाद उनकी सरकार गिर गई लेकिन वो आग बची रही। इसका परिणाम यह हुआ कि दोबार हुए चुनावों में फिर बहुमत से सरकार बनाने में सफल रहे। यह इतिहास ही है कि इतने कम समय में कोई आम व्यक्ति एकदम से लोकप्रियता हासिल कर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच जाये।

दिल्ली इन दिनों एक नए तरह के बवाल की गवाह बनी है, इससे आप सभी रूबरू होंगे। पिछले करीब 3 महीनों से दिल्ली के आईएएस अधिकारी सरकार के काम काज का बहिष्कार किए हुए हैं। वे न तो किसी मंत्री की बैठक में शामिल हो रहे है और न ही सरकार के कामकाज में सहयोग दे रहे हैं। यह ऐतिहासिक कारनामा भी इतिहास पुरुष अरविंद केजरीवाल के समय में हो रहा है। 

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और आगे नजर दौड़ाए तो पिछले चार दिनों से दिल्ली के सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया अपने दो अन्य मंत्रियों गोपाल राय और सत्येंद्र जैन के साथ उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में ही धरना दे रहे हैं। इनमें डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया और सत्येंद्र जैन तो भूख हड़ताल पर हैं। चार दिन बीत गए न एलजी उनकी सुन रहे हैं और न ही आइएएस अधिकारी पसीज रहे हैं।

यह भी भारत के इतिहास में अपनी तरह की पहली ही घटना है। रिकार्ड भले ही नए हों लेकिन दिल्ली वालों के हालात अभी पुराने ही हैं। वहीं पुरानी समस्यायें आज भी उन्हें झकझोंर रही हैं। दिल्लीवासी असमंजस में है और इस सबके पीछे कौन जिम्मेदार है यह तक तय नहीं कर पा रहे हैं। 

 

 

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