सपा मजदूर सभा के 500 समर्थकों ने एक साथ इस्तीफा देकर थामा शिवपाल का दामन

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कानपुर में पूरी कार्यकारिणी ने छोड़ी पार्टी,पुराने लोगों की उपेक्षा का लगाया आरोप

कानपुर। चाचा- भतीजे की खींचतान के बीच सपा को बुधवार को एक बड़ा झटका उस वक्त लगा जब उसके मजदूर सभा के नगर अध्यक्ष ने अपने 500 समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा देकर शिवपाल चाचा के समाजवादी सेक्युलर मोर्चा में शामिल होने का एलान कर दिया। मजदूर सभा के अध्यक्ष व उनके समर्थकों ने अपना इस्तीफा डाक से सपा कार्यालय भेज दिया है।

शिवपाल सिंह यादव के समाजवादी सेक्युलर मोर्चे ने अपनी सक्रियता दिखाना शुरू कर दी है, मोर्चे से अगर सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा तो समाजवादी पार्टी का हो रहा है जिसका नतीजा कानपुर में देखने को मिला. कानपुर की सपा मजदूर सभा की पूरी कार्यकरणी ही भंग हो गयी। 

 

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समाजवादी मजदूर सभा के नगर अध्यक्ष राजू ठाकुर ने अपने 500 कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक रूप से पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी में अपमान और नजरंदाज किये जाने का आरोप लगाया है उनका आरोप है कि समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष मोईन खान और समाजवादी मजदूर सभा के रामगोपाल पुरी के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

जिसकी वजह से मजदूर सभा के पदाधिकारियों को नेतृत्व की तरफ से तवज्जो नहीं दिया जा रहा है लगातार मजदूर सभा के पदाधिकारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है मुलायम सिंह यादव ने सपा मजदूर सभा का गठन किया था और मजदूरों की समस्याओं और उनके मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर दी थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब से बागडोर अखिलेश यादव के हाथ में आयी है सब कुछ बर्बाद हो गया है विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवा कर भी अखिलेश यादव ने सीख नहीं ली सपा की जमीन तैयार करने वाले नेताओं को दूध से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया बहुत ही जल्द उनकी मनमानी का नतीजा लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद देखने को मिलेगा।

 

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उन्होंने कहा विभिन्न जनपदों में पूंजी पतियों को सर्वोच्च पद पर एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बैठाने का काम कर रहे हैं पुराने जानकार समाजवादियों को दरकिनार किया जा रहा है ,समाजवादी पार्टी की राजनैतिक स्थिति अब ठीक नहीं है पुराने समाजवादियों के लिए पार्टी में स्थान नहीं बचा है।उन्होंने कहा मैंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता 1997 में ली थी और विभिन्न पदों पर रह कर पार्टी के लिए दिन रात मेहनत की थी। ?

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