उपसभापति चुनाव ने बढ़ाई कांग्रेस-आप के बीच रार

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आप ने महागठबंधन में राहुल गांधी को बताया सबसे बड़ा रोड़ा


राहुल गांधी द्वारा अरविंद केजरीवाल से समर्थन के लिए बात न करने पर बढ़ा विवाद 

 

नई दिल्ली। राज्यसभा के उपसभापति चुनाव के बाद महागठबंधन की ओर बढ़ रहे विपक्ष के प्रयासों को झटका लग सकता है। दरअसल इस चुनाव में विपक्षी दलों में सेंधमारी कम से कम यही दर्शाती है। वहीं आम आदमी पार्टी (आप) भी इस चुनाव को लेकर कांग्रेस से खासा खफा है। आलम यह है कि आप के संयोजक व दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने रोहतक में यह तक कह डाला कि जनता को गठबंधन पर विश्वास ही नहीं है। यही नहीं आप नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने महागठबंधन के लिए राहुल गांधी को सबसे बड़ा रोड़ा तक करार दे डाला।

 

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कांग्रेस और आप के बीच रार बढ़ने का मामला भी काफी रोचक है। आम आदमी पार्टी यह चाहती थी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने उपसभापति पद के प्रत्याशी के लिए अरविंद केजरीवाल से स्वयं समर्थन मांगें। लेकिन राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल से बात नहीं की। इस वजह से आप के सांसद ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। ऐसा चर्चा में है कि केजरीवाल चाहते थे कि समर्थन के लिए राहुल बात करें ताकि कांग्रेस को वे अपने दबाव में ले सके।

वहीं राहुल गांधी जान चुके थे कि आप के 3 वोटों से उनका प्रत्याशी ​जीतने वाला नहीं। अगर वे बात करते तो इससे कांग्रेस का कद कम होता। अब इस रार को लेकर कांग्रेस व आप नेताओं के बीच ट्वीट युद्ध जारी है। संजय सिंह ने ट्वीट कर यह साफ कर दिया कि आप के तीनों राज्सभा सांसद वोटिंग का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने इस बात पर नाराजगी भी जताई कि जब नीतीश कुमार एनडीए के प्रत्याशी को वोट दिलवाने के लिए अरविंद केजरीवाल से बात कर सकते हैं, तो फिर राहुल गांधी को वोट के लिए केजरीवाल से बात करने में क्या दिक्कत थी।

गुरुवार को संजय सिंह ने यह तक कह डाला कि विपक्षी एकता की राह में राहुल गांधी सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी का अध्यक्ष अपने प्रत्याक्षी के लिए वोट नहीं मांग सकता, वो चुनाव कैसे जीतेगा। दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने केजरीवाल पर सवाल उठाते हुए ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी एक ऐसे शख्स से समर्थन क्यों मांगेंगे, जो खुलेआम यह कह चुके हैं कि अगर नरेंद्र मोदी उनकी मांगें मान लेते हैं, तो वह 2019 के चुनावों में उन्हें सपोर्ट करेंगे और उनके कैंपेन भी करेंगे।

 

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राजनीति विचारधाराओं की लड़ाई है, लेन-देन में लगे अवसरवादियों का अखाड़ा नहीं। इसके जवाब में दिल्ली सरकार के प्रवक्ता नागेंद्र शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि अगर ऐसा है, तो फिर कांग्रेस के तीन सीनियर नेताओं ने बुधवार को गुपचुप तरीके से आप नेताओं से बात की? अगर आप उनके नाम जानना चाहती हैं, तो हमें तुरंत उनके नाम सार्वजनिक करने में भी कोई दिक्कत नहीं है। इसका जवाब कांग्रेस नेता माकन ने बिहार और उड़ीसा के मुख्य मंत्रियों की ओर इशारा करते हुऐ कहा हम एक और नीतीश और पटनायक नहीं बनाना चाहते, जिन्होंने कांग्रेस को धोखा देकर बीजेपी से हाथ मिला लिया। 

 


 

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