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आइए जानें नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा

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धर्म, Dharm

 नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था


आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी, दुराचारी, दुर्दांत असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। 

भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध करके उन 16000 स्त्रियों को छुड़ाया था ,जनता को नरकासुर के ज़ुल्मो से बचाया था। वध के बाद 16000 स्त्रियां आत्महत्या करने जा रही थी क्योकि उस नरकीय जीवन के बाद उन्हें कोई नाम देने को तैयार नही होता,परंतु भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अपना सांकेतिक नाम देकर जान देने से बचाया शांति स्थापित की, और जब श्री कृष्ण लौटे तब उनके स्वागत में दिए जलाए गए। 

दीपावली पर्व से ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चतुर्दशी भी कहा जाता है। माना जाता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

नरकासुर को आप वर्तमान में गंदगी की नरक से तुलना कर सकते हैं जो जानलेवा बीमारियो का कारण बन सकती है, अतः नरक चौदस के दिन- शरीर, घर, शौचालय, व आस पास की जगह सफाई करके, दिए की रोशनी करनी चाहिए।  और यथासंभव स्वक्षता अपनाकर बीमारियो से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही किसी के भी अन्याय का प्रतिरोध करने का संकल्प भी लेना चाहिए।

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें।  इस प्रकार पाप से  मुक्त होगे और विष्णु लोक में स्थान प्राप्त होगा। 

 

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