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चरणस्पर्श एक परम्परा या विधान नहीं है, अपितु यह है एक विज्ञान   

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धर्म,  Dharm


लखनऊ I भारतीय समाज में परिवार के बड़े-बुजुर्गों तथा संत-महात्माओं का चरणस्पर्श करने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस परम्परा के पीछे अनेक कारण मौजूद हैं।आइए जानते हैं इस परंम्परा के पीछे के कारणों के बारे में, हिन्दू धर्म में शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि वरिष्ठ वयोवृद्ध जन के चरण स्पर्श से हमारे पुण्यों में वृद्धि होती है। उनके शुभाशीर्वाद से हमारा दुर्भाग्य दूर हो जाता है तथा मन को शांति मिलती है।

बड़ों का चरण स्पर्श अथवा प्रणाम एक परम्परा या विधान नहीं है, अपितु यह एक विज्ञान है, जो हमारे मनोदैहिक तथा वैचारिक विकास से जुड़ा है।इससे हमारे मन में अच्छे संस्कारों का उदय होता है तथा नई पुरानी पीढ़ी के बीच स्वस्थ सकारात्मक संवाद की स्थापना होती है।चरण स्पर्श, प्रणाम-निवेदन करना
अभिवादन भारतीय सनातन शिष्टाचार का महत्वपूर्ण अंग है, यह एक जीवन संस्कार है।

प्रणाम-निवेदन में नम्रता, विनयशील, श्रद्धा, सेवा, आदर एवं पूज्यता का भाव सन्निहित रहता है। अभिवादन से आयु, विद्या, यश, एवं बल की वृद्धि होती है। भारतीय परम्परा में प्रात: जागरण से शयन पर्यन्त प्रणाम की अविछिन्न परम्परा प्रवाहमान रहती है।

जानें कितने प्रकार से किया जाता है बड़े - बुजुर्गों का चरण स्पर्श। प्रात: का दर्शन भूमि वन्दन से लेकर शयन से पूर्व ईश विनय तक सबमें अभिवादन का भाव शामिल रहता है।बड़े बुजुर्गों का चरण स्पर्श तीन प्रकार से किया जाता है।

1 - झुक कर 
2 - घुटनों के बल बैठ कर
3 - साष्टांग प्रणाम कर।

इनसे जो आध्यात्मिक लाभ होता है, वह तो है ही, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी प्रणाम की प्रक्रिया अत्यन्त लाभदायक है। जानिए इन विधियों के बारे में…

 

* पहली विधि यानी झुककर चरण स्पर्श करने से कमर और रीढ़ की हड्डी को आराम मिलता है।

* दूसरी विधि से शरीर के सारे जोड़ों को मोड़ा जाता है जिससे उनमें होने वाले दर्द से राहत मिलती है।

* तीसरी विधि से चरण स्पर्श करने यानि साष्टांग प्रणाम करने से शरीर के सारे जोड़ थोड़ी देर के लिए तन जाते हैं तथा इससे तनाव दूर होता है।

 

इसके अलावा प्रथम विधि द्वारा चरण स्पर्श में झुकना पड़ता है। झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है जो स्वास्थ्य, खास तौर पर नेत्रों के लिए लाभकारी है।
द्वितीय तथा तृतीय विधि से चरण स्पर्श करने से स्वास्थ्य लाभ होता है और अनेकों रोगों को दूर करने में सहायक है।

चरण स्पर्श से मन का अहंकार समाप्त होता है तथा हृदय में समर्पण और विनम्रता का भाव जागृत होता है। इसलिए भारतीय संस्कृति में बड़ों के सादर चरण स्पर्श की पुरातन परम्परा है।

 

जाने क्या है साष्टांग प्रणाम…


अभिवादन की श्रेष्ठतम विधि साष्टांग प्रणाम है। पेट के बल भूमि पर दोनों हाथ आगे फैलाकर लेट जाना साष्टांग प्रणाम है। इसमें सम्तक भ्रूमध्य, नासिका, वक्ष, ऊरू, घुटने, करतल तथा पैरों की उंगलियों का ऊपरी भाग-ये आठ अंग भूमि से स्पर्श करते हैं और फिर दोनों हाथों से सामान्य पुरुष का चरण स्पर्श किया जाता है।वास्तव में प्रणाम देह को नहीं अपितु देह में स्थित सर्वान्तर्यामी पुरुष को किया जाता है। एक हाथ से प्रणाम आदि करना शास्त्र-निषेध है। 

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