इबादत की ख़ास वजह, शब-ए-बारात

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धार्मिक /Religion


लखनऊ। इस्लाम धर्म में मुसलमानों के लिए यह रात बहुत फजीलत (महिमा) की रात होती है। इस दिन विश्व के सारे मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। वे दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। इबादत, तिलावत और सखावत (दान-पुण्य) के इस त्योहार के लिए मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास सजावट की जाएगी। रात में मनाए जाने वाले शब-ए-बरात के त्योहार पर कब्रिस्तानों में भीड़ का आलम रहेता हैं।

खैरात करना इस रात के अहम काम है।

पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम है। मुस्लिम धर्मावलंबियों के प्रमुख पर्व शब-ए-बरात के मौके पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में शानदार सजावट होगी तथा जल्से का एहतेमाम किया जाएगा। रात में मुस्लिम इलाकों में शब-ए-बरात की भरपूर रौनक होगी। शब-ए-बरात की रात शहर में कई स्थानों पर जलसों का आयोजन किया जाएगा।

बरआत का अर्थ बरी होना होता है। 

अरब में यह लयलातुल बराह या लयलातून निसफे मीन शाबान के नाम से जाना जाता है। जबकि, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, अफगानिस्तान और नेपाल में शब-ए-बारात के नाम से जाना जाता है। इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग अल्लाह की इबादत के तौर पर मनाते हैं साथ ही शब-ए-बारात की रात मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। शब का मतबल रात होता है और बरआत का अर्थ बरी होना होता है। 

इस रात को मुसलमान दुआएं मांगते हैं

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह रात साल में एक बार शाबान महीने में होती हैं। इस्लाम में यह रात बेहद फजीलत की रात मानी जाती है इस रात को मुस्लिम दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं. शब-ए-बारात की सारी रात इबादत और तिलावत का दौर चलता है। इस रात अपने उन परिजनों, जो दुनिया से रुखसत हो चुके हैं, उनकी मगफिरत की दुआएं की जाती हैं। 

खुदा अपने बंदों का पूरे साल का हिसाब-किताब करते हैं।

इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। बरकत वाली इस रात में हर जरूरी और सालभर तक होने वाले काम का फैसला किया जाता है और यह तमाम काम फरिश्तों को सौंपे जाते हैं। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार यह रात पूर्व के समय में किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली मानी जाती है इसलिए इस रात को शब-ए-बारात के तौर पर जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि तौबा की इस रात को अल्लाह तआला अपने बंदों का पूरे साल का हिसाब-किताब करते हैं।

शब-ए-बरात जैसी रातों में लोग अपने घरों पर नफली इबादतों का अहतमाम करें खिलाफे सुन्नत जैसे कामों से खुद को बचाते रहें रातभर घूमना-फिरना, कब्रिस्तान के आसपास मेले जैसी स्थिति बनाना, मजलिसें लगाना जायज नहीं है। शब-ए-बरात पर बच्चों व नौजवानों को बाइक पर स्टंट, पटाखे चलाने व हुड़दंग जैसे कामों से बचना चाहिए। 

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