loader

इन मंदिरो में बप्पा करते है मुराद पुरी

Foto

धर्म के समाचार

लखनऊ। पूरे भारत में अनेक प्रकार के त्योहार और उनकी अपनी एक अलग ही मान्यता है। इसी कड़ी में गणेश चतुर्थी का त्योहार भी काफी प्रमुख है। मान्यताओं कि माने तो इस दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। इस साल यह त्योहार 13 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस त्योहार की धूम भारत के सभी राज्यों में रहती है लेकिन महाराष्ट्र में इस त्योहार की रौनक ही कुछ अलग होती है। जहां एक ओर महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की छठा देखने को मिलती है वही दूसरी ओर कुछ ऐसे भी मंदिर है जिनकी अपनी भी एक मान्यता है।

 

यह भी पढ़ें: शान से विराजेंगे गजानन, इस तरह की जा रही है गणेश चतुर्थी की तैयारी

 

अनेगुड्डे विनायक मंदिर

उपरोक्त मंदिर के अलावा आप इस राज्य के अन्य मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं। इसलिए अब हम आपको अनेगुड्डे विनायक मंदिर के दर्शन करवाने जा रहे हैं। यह मंदिर कुंभारी गांव में स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर में अगस्त्य ऋषि यहां यज्ञ करने के लिए आए थे। लेकिन उनके यज्ञ में विंघ्न डालने के लिए दैत्य कुंभासुर वहां आ गया। अगस्त्य ऋषि की रक्षा करने के लिए भगवान गणेश ने भीम को दिव्य अस्त्र देकर भेजा, फलस्वरूप वो दानव बलशाली भीम के हाथों मारा गया। यहां के भगवान सिद्धी विनायक के नाम से जाना जाता है। इस गांव का नाम भी इस राक्षक के नाम पर ही आधारित है।

 

हत्तीनगढ़ी विनायक मंदिर

 

आप इस राज्य के उडपी जिले स्थित हत्तीनगढ़ी विनायक मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर जिले के हत्तीनगढ़ी गांव में स्थित है, और 8वीं शताब्दी से संबंध रखता है। यह मंदिर दक्षिण भारत के प्रसिद्ध गणेश तीर्थस्थलों में भी गिना जाता है, जहां रोजाना दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगती है। माना जाता है कि हत्तीनगढ़ी अलुप राजाओं की राजधानी था, जो सातवी से लेकर आठवी शताब्दी के मध्य तुलुनाडु में राज किया करते थे। भगवान गणेश का यह मंदिर यहां की वराही नदी के तट पर बना हुआ है। मंदिर के आसापास के प्राकृतिक दृश्य देखने लायक है। आत्मिक और मानसिक शांति का अनोखा अनुभव प्राप्त करने के लिए आप यहां आ सकते हैं।

 

यह भी पढ़ें: Hartalika Teej 2018 : ऐसे बनायें इसे खास, जानें यहां

 

गणेश मंदिर, इदागुनजी

कर्नाटक के इस प्रसिद्ध मंदिर का नाम भारत के पश्चिम तट के 6 प्रसिद्ध मंदिरों में शुमार है। यह यहां का काफा महत्वपूर्ण मंदिर है। इस मंदिर के तार को द्वापर युग से अंत और कलयुग की शुरुआत के मध्य के समय से जोडा गया है। यह मंदिर इस राज्य से उत्तर में कन्नड के इदागुनजी के निकट स्थित है। माना जाता है कि इदागुनजी के गणेश देवता हवयक ब्राह्मण के कुलदेवता हैं।

leave a reply

धर्म

Live: ख़बरें सबसे तेज़

प्रमुख श्रेणी