यहां इंसानी रूप में दर्शन देते हैं भगवान गणेश ...

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लखनऊ। विलक्षंण है भारत और यहां की मान्यताएं। धर्म का मामला हो या सांस्कृतिक विरासत का हर बार यहां विलक्षणता के दर्शन हो ही जाते हैं। दक्षिण भारत में एक ऐसा भगवान गणेश का मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान गणेश मानव रूप में विद्यमान हैं और लोग अपने पूर्वजों की शान्ति के लिए यहां पर आराधना करते हैं। उनकी आराधना से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। जी हां इस मंदिर को लोग आदि विनायक के नाम से भी जानते हैं।

 

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अद्भुत मंदिर

इस मंदिर के साथ एक बहुत ही पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि यहां कभी भगवान राम आए थे। उन्होंने यहां आकर अपने पितरों की शांति की पूजा की थी। जिसे आज भी यहां के लोग पूरे रीति और रिवाज से मनाते है। दक्षिण भारत का यह मंदिर अपनी इन खूबियों के चलते ज्यादा प्रसिद्ध है। लेकिन यह मंदिर यहां के बाकी मंदिरों की तुलना में उतना विशाल नहीं है। पितरों की शांति को लिए की गई पूजा के महान उद्देश्य की वजह से उस मंदिर को तिलतर्पणपुरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में दूर दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं।

 

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भगवान राम से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान राम अपने पिता का अंतिम संस्कार कर रहे थे, तो उनके द्वारा रखे गए चार पिंड (चावल के लड्डू) कीड़ों के रूप में तब्दील हो गए थे, ऐसा बार-बार हुआ तो भगवान राम ने भोलेनाथ से प्रार्थना की। भगवान शिव ने उन्हें इस स्थान(आदि विनायक मंदिर) पर आकर पूजा करने के लिए कहा। जिसके बाद भगवान राम का इस मंदिर में आगमन हुआ और उन्होंने अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए भोलेनाथ की पूजा की। माना जाता है कि चावल के वो चार पिंड चार शिवलिंग में बदल गए थे। वर्तमान में ये चार शिवलिंग आदि विनायक मंदिर के पास स्थित मुक्तेश्वर मंदिर में मौजूद हैं।

भगवान शिव का मंदिर

इस मंदिर में भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। यह भोलेनाथ का एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पास में ही माता सरस्वती का भी एक मंदिर है। जहां लोग दूर-दूर से आकर दर्शन करते हैं। यहां आने वाला हर एक श्रद्धालु आदि विनायक के साथ मां सरस्वती और भगवान शिव के मंदिर पर माथा जरूर टेकता है।

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