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जाने कौन से भगवान की पूजा से मनता है धनतेरस   

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धर्म, Dharm

 

धनतेरस का अभिप्राय धन की तेरस से नही है और न ही अकस्मात लाखो वाहनों की खरीद फरोस्त से है । किंवदंतियों के अनुसार  समुद्र मंथन के बाद धनतेरस के दिन, अंत मे भगवान धन्वंतरि का उदय हुआ था।  जिनके हाथों में अमृत भरा कलश, पुस्तक व जड़ी बूटी थी, जिनमे अच्छे स्वास्थ्य का रहस्य छुपा था। 
 
भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य के देवता की उपाधि दी गयी, क्योकि मंथन से उत्पन्न सबसे मूल्यवान वस्तु व्यक्ति के दीर्घायु होने के लिए स्वास्थ्य के सूत्र जानना था। इसीलिए उस दिन को धनतेरस की उपाधि देते हुए भगवान धन्वंतरि की उपासना का दिन बनाया गया।

 

 

लेकिन कालांतर में, धन शब्द जुड़ा होने के कारण , इसे, धन की त्रयोदशी समझा जाने लगा और इस दिन लोग धन की पूजा व विभिन्न वस्तुएं खरीदने लगे, घर मे संपन्नता लाने हेतु। प्राचीन समय मे बर्तन खरीदने की रिवाज थी, जो धन्वंतरि के कलश का सांकेतिक रूप था,जिसमे स्वास्थ्य का अमृत भरना उद्देश्य होता था, लेकिन धीरे धीरे दीपावली के पहले होने के कारण इसकी महत्ता पूर्णतयः धन से ही हो गयी और वाहन खरीदने की भी परंपरा जुड़ गयी।

अब हर धनतेरस को लाखों वाहन सड़क पर आ जाते है और भगवान धन्वंतरि जो स्वास्थ्य का धन देना चाहते थे। उसका उल्टा सड़क पर प्रदूषण व बीमरिओ के रूप में मिलने लगा, कही न कही इसमें व्यावसायिक स्वार्थ भी रहे होंगे। एक अच्छे स्वास्थ्य से बड़ा धन कुछ भी नही है I अच्छी जीवनशैली, स्वस्थ आहार, सकारात्मक सोच, परोपकार के साथ  भगवान धन्वंतरि की पूजा करे, यही धनतेरस के दिन जीवन के मंथन से निकली अमृतवाणी है।


क्या खरीदें धनतेरस पर 

लगभग हर वर्ष  धनतेरस पर सभी लोग कुछ न कुछ जरूर खरीदतें है  बावजूद इसके उन्हें कई आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आप इस दिन सिर्फ 5 रूपए की साबुत धनिया खरीद ले,  जी हां, धनतेरस के दिन सिर्फ धनिया खरीदकर आप आर्थिक परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं।  फिर इसे संभालकर पूजा घर में रख दें और दीवाली के दिन इसकी पूजा करें। अगली सुबह इसे गमले या बाग में फैला दें। ऐसी मान्यता है कि धनिया से निकले हरे-भरे पौधे घर में सुख-समृद्धि लाते हैं

 

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