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खेडाकुरतान शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की मुरादें होती हैं पूरी...

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धर्म के समाचार 

किसान ने पत्थर समझ शिवलिंग से लगायी थी दरांती पर धार

इकराम अली

लखनऊ। हरियाणा व यूपी के लोगों के लिए आस्था का केन्द्र है खेडाकुरतान का शिव मंदिर शामली। जनपद के गांव खेड़ा कुरतान में सिद्धपीठ प्राचीन शिव मंदिर आस्था एवं सुंदरता का प्रतीक है। जहां पर श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना करके मन्नतें मांगने वाले श्रद्धालुओं की मुरादे पूरी होती है।

 

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कांवड यात्रा के दौरान मंदिर में प्रतिवर्ष हरियाणा और आस-पास के हजारों कांवडिये पवित्र गंगा जल से भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते है। 
जिला मुख्यालय से 22 किलो मीटर दूरी पर गांव खेड़ा कुरतान है। गांव में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर सिद्धपीठ के रूप में जाना जाता है। मंदिर निर्माण के बारे में प्रचलित ग्रामीणों के कथानुसार करीब 128 वर्ष पूर्व गांव के किसान केहर सिंह अपने घर से खेत पर जाने के लिए निकले थे।

 

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केहर सिंह रास्ते में अपनी दरांती को धार लगाने के लिए रास्ते में पडे एक पत्थर पर घिसने लगे, तो पत्थर में से लाल रंग की धारा बह निकली। किसान ने यह बात आकर ग्रामीणों को बतायी। बाद में किसान केहर सिंह ग्रामीणों के साथ मौके पर गया तो वह मात्र पत्थर नहीं बल्कि शिवलिंग था। भगवान शिव रात्रि में किसान केहर सिंह के सपने में आए, और उसी स्थान पर शिव मंदिर बनाने की प्रेरणा दी। ग्रामीणों ने शिवलिंग को निकालने का प्रयास किया। दिन भर शिवलिंग को जमीन से निकालने की चर्चा दूसरे गांवों में भी फैल गई।

  

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रात्रि में पास के गांवों के ग्रामीणों ने शिवलिंग को निकालने का प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग टस से मस नहीं हुआ। ग्रामीण जितना शिवलिंग को बाहर निकालने का प्रयास करते उतना हीं शिवलिंग जमीन के अंदर चला जाता। शिवलिंग के जमीन से नहीं निकलने पर ग्रामीण शिवलिंग को ऐसे हीं छोड़कर चले गए। बाद में किसान केहर सिंह ने ग्रामीणों की मदद से शिव मंदिर का निर्माण कराया। भूगर्भ से उत्पन्न हुआ चार फीट का शिवलिंग पूरे क्षेत्र में आस्था का केंद्र बना हुआ है।

 

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गांव में 60 प्रतिशत मुस्लिम आबादी होने के बाद भी सभी जाति के लोग मंदिर में लगने वाले मेले और भंडारे में विशेष सहयोग करते है। श्रावण मास में मंदिर में हरियाणा सहित आस-पास के जनपदों के हजारों कांवडिये भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपने इष्ट देव प्रसन्न करते है। सिद्धपीट होने के कारण इस मंदिर को भोलेनाथ पुरी भी कहते है।

 

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