जानिए क्यों धरती पर देवता मनाने आते हैं दीवाली?

Foto

धर्म के समाचार/News of religion

 

लखनऊ। हिन्दू धर्म में दीवाली त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का अंत करने के बाद माता सीता को लेकर अयोध्या पहुंचे थे। भगवान राम के अयोध्या पहुंचने पर यहां के लोगों ने घरों में दीपक जलाकर पूरी नगरी में रोशनी की थी। इस दिन माता लक्ष्मी भी घरों में पूजा पाठ का माहौल देखने आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि स्वर्ग से देवता भी दीवाली का त्योहार मनाने के लिए धरती पर आते हैं। बताते चलें कि दीवाली त्योहार के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्वर्ग से देवता गंगा नदी के किनारे आते हैं। यहां सभी देवता दीवाली मनाते हैं। इसलिए इस दिन को देव दीपवली के नाम से भी जाना जाता है। देव दीपावली के दिन गंगा के घाटों और कुंडों की साफ-0सफाई की जाती है और किनारों पर दीया जलाया जाता है। 

 

 


काशी का विशेष महत्व 


देव दीपावली का पर्व मनाने के लिए बनारस का विशेष महत्व है। यहां काशी में गंगा किनारे हफ्तों पहले से साफ सफाई का कार्य शुरू कर दिया जाता है। चूंकि यहां देवता स्वर्ग लोक से गंगा किनारे दीवाली मनाने धरती पर उतरते हैं। पूरे गंगा नदी का श्रृंगार दीपक जलाकर किया जाता है। इस समय यहां की छवि बहुत ही अद्भुत होती है। न केवल देश बल्कि विदेश से भी पर्यटक यहां का नजारा देखने पहुंचते हैं। हालांकि, देव दीपावली को लेकर और भी कई तरह की मान्यताएं हैं। शैव सम्प्रदाय के मुताबिक त्रिपुर राक्षस का भगवान शंकर ने इस दिन ही वध किया था। इसके उपलक्ष्य में काशी में देवताओं ने दीवाली मनाई। इसलिए इस दिन को देव दीपावली कहा गया। 

 


ये भी मान्यता


एक अन्य मान्यता के अनुसार काशी के प्रथम राजा देवदास थे। श्रृष्टि रचयिता भगवान ​ब्रह्मा के हिने पर देवदास यहां के राजा बने थे। लेकिन देवदास ने राजा बनने के लिए शर्त रखी थी कि यहां से सीभी देवता धरती छोड़कर स्वर्ग चलें जाएंगे तो ही वह राजा बनना स्वीकार करेंगे। इसके बाद सभी देवता स्वर्ग चले गए थे। लेकिन कुछ समय बीत जाने के बाद फिर से देवता काशी में अपना देव रूप परिवर्तित पहुंचने लगे। इस खुशी में यहां पर उत्सव का आयोजन किया गया। इस उपलक्ष्य में लोगों ने खुशी का इजहार करने के लिए दीवाली मनाई। बताते चलें कि बनारस के 84 घाटों और दो दर्जन से अधिक कुंडों में 51 लाख से भी अधिक दीए जलाए जाते हैं। इससे यहां की छटा बिल्कुल ही मनोहर और आलौकिक हो जाती है। यहां स्वर्ग सा माहौल बन जाता है और लगता है कि देवता दीवाली मना रहे हैं।

 

यह भी पढ़ें...शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए करे ये उपाय, जानिए शनिवार का राशिफल

यह भी पढ़ें...पंचांग ( PANCHANG ), शनिवार का पंचांग ( SHANIWAR KA PANCHANG), आज का पंचांग (AAJ KA PANCHANG)

leave a reply

धर्म

Live: ख़बरें सबसे तेज़

प्रमुख श्रेणी