मृत्यु भय से छुटकारा पाने के लिए मां कालरात्रि को करें प्रसन्न, ऐसे करें पूजा

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नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा होती है। जिन भक्तों पर मां कालरात्रि की कृपा होती है, उनको मृत्यु का भय कभी नहीं सताता। अटल मृत्यु भी माता की कृपा से टल जाता है। काल से भी सुरक्षा करने के कारण माता को कालरात्रि कहते हैं। मां की सच्चे मन से पूजा करने पर सभी तरह के भय दूर हो जाते हैं। किसी भी मुश्किल घड़ी में माता हमेशा साथ देती हैं। कभी भी शत्रु आप पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता। 

 

 

गुड़ का लगाएं भोग

 

पंडित कृष्ण मुरारी मिश्रा बताते हैं कि नवरात्रि के सप्तम दिन देवी मां को गुड़ का भोग लगाएं। सातवें दिन नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा होती है। मां कालरात्रि की पूजा के लिए सबसे पहले साफ सुथरी चौकी पर माता कालरात्रि की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल से जहां भी माता का स्थापित किया गया है, उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध करना न भूलें।

 


कलश की करें स्थापना 


माता काला​रात्रि की पूजा करने से पहले चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद चौकी पर भगवान श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका की स्थापना भी करें। इतना सब करने के बाद इस दिन सच्चे मन से पूजा करने का संकल्प करते हुए वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों से माता और अन्य देवी देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। पूजा में आप आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा व अन्य शुभ वस्तुओं का प्रयोग करें।

 


इस मंत्र से करें प्रसन्न

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।

लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।

वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

 

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