नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी को खुश करने के लिए करें ये काम...

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धर्म के न्यूज/Religion News


नवरात्रि पर्व पर माता की अराधना के साथ ही व्रत-उपवास और पूजन का विशेष महत्व है। जिस प्रकार नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार इस नौ दिनों में माता को प्रत्येक दिन के अनुसार भोग या प्रसाद अर्पित करने से देवी मां सभी प्रकार की समस्याओं का नाश करती हैं। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। माता के इस रूप को तपश्चारिणी भी कहते हैं। मां का यह रूप तप और कठोर परिश्रम की सीख लोगों को देता है। मान्यता है कि मां के इसी स्वरूप ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर ​तप किया था।

 

 

 

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ये है प्रचलित कहानी

 

मान्यता है कि माता ​ब्रह्मचारिणी हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। देवर्षि नारद भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए उनको कठोर तप करने को कहा था। इसके बाद माता ब्रह्मचारिणी ने बिना कुछ खाए पीए भगवान शंकर की तपस्या करके प्रशन्न किया था। ब्रह्मा जी ने माता को वरदान भी दिय था। जब माता ने काठोर तप करके भगवान शिव को खुश किया तो उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। माता के इस स्वरूप की पूजा करने से मन एकाग्र रहता है और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है। 

 

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शक्कर का भोग

 

नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी का होता है। इस दिन देवी मां को शक्कर का भोग लगाने से माता प्रसन्न होती हैं। इस भोग को देवी के चरणों में अर्पित करने के बाद परिवार के सदस्यों में बांटने से सभी की आयु में वृद्धि होती है। माता ब्रह्मचारिणी को पहचानने के लिए हम आपको बता दें​ कि एक हाथ में जप की माला और दूसरे में कमंडल धरण किए हुए रहती हैं। माता का कोई भी वाहन नहीं है, वह धरती पर खड़ी रहती हैं। सिर पर मुकुट के साथ ही श्रृंगार फूलों से होता है। माता के हांथों का कंगल, गले में हार, कानों का कुंडल और बाजुबंद भी कमल के फूलों से सुसज्जित होता है।

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