श्री रामकथा दृढ़ संकल्प, शक्ति और सामर्थ की शिक्षा देती है, स्वामी चिदानन्द सरस्वती

Foto

Religious/धार्मिक

परमार्थ निकेतन गंगा तट पर राष्ट्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, माँ गंगा सहित देश की सभी नदियों को समर्पित मानस कथा में आज परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, चेतन ज्योति आश्रम के महंत ऋषिश्वरानन्द जी महाराज, मुम्बई से आये श्री स्वामी सम्विदानन्द जी महाराज, राजस्थान की धरती से आये महंत रामप्रसाद जी महाराज, प्रसिद्ध भजन गायक श्री नंदू भैय्या जी और अन्य पूज्य संतों एवं महंतों ने सहभाग कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। मानस कथा व्यास श्री मुरलीधर जी के मुखारबिन्द से माँ गंगा के तट पर मानस की ज्ञान रूपी गंगा प्रवाहित हो रही है। 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने मानस कथा के मंच से कहा कि ’’पुरूषार्थ, परिश्रम और पारदर्शिता तीनों की त्रिवेणी प्रवाहित हुई है राष्ट्र में और उसी का परिणाम है यह राष्ट्राभिषेक और कल्पनातीत ऐतिहासिक विजय। देश राज्याभिषेक से राष्ट्राभिषेक की ओर अग्रसर हो रहा है। हमारे जीवन में पुरूषार्थ हो; परिश्रम हो और पारदर्शिता हो तो जीवन ही नहीं बल्कि राष्ट्र भी दिव्य और भव्य बनेगा। जीवन को ऊँचाई पर ले जाने के लिये इन तीनों की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि जीवन हो या राष्ट्र हम इन तीनों तत्वों को महत्व दें।
स्वामी जी ने कहा कि आज देश में जो लहर है वह वास्तव में राष्ट्र सेवा करने का दृढ़ संकल्प है। महात्मा गांधी जी ने कहा था दृढ़ संकल्प एक गढ़ के समान है जो भंयकर प्रलोभनों से हमे बचाता है, दुर्बल और डांवाडोल होने से हमारी रक्षा करता है। राष्ट्र की सेवा करने के दृढ़ दसंकल्प में अद्भुत शक्ति होती है जो व्यक्ति इस शक्ति से प्रेरणा लेता है वही ऐसे ऐतिहासिक परिणाम ला सकता है और देश को अत्यंत सफल नेतृत्व दे सकता है। श्री रामकथा भी दृढ़ संकल्प, शक्ति और सामर्थ की शिक्षा देती है।
 
मानस कथाकार मुरलीधर ने आज मानस कथा के प्रसंग में कहा कि परमात्मा को पाने का मार्ग अभय से होकर जाता है। उन्होने कहा कि धर्म को भय वश नहीं बल्कि अभय होकर स्वीकार करो और उसके अनुरूप आचरण करो यही तो जीवन का सार है।
महंत ऋषिश्वरानन्द जी महाराज ने कहा कि प्रभु श्री राम की कथा जन कल्याण की शिक्षा देती है। मैं आज यहां पर देख रहा हूँ कि मानस कथा की व्यासपीठ से स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी द्वारा जो जन कल्याण का संदेश प्रसारित किया जा रहा है वास्तव में वह अनुकरणीय है। मैने कथा के अवसर पर भण्डारे होते तो बहुत देखे है परन्तु पेड़ भण्डारा परमार्थ निकेतन में ही देखा है। मेरा मानना है कि स्वामी जी अतिथियों को पौधे़ भेंट स्वरूप देते है वास्तव में यह पेड़ नहीं बल्कि भावी पीढ़ियों के लिये आॅक्सीजन बैंक है जो भारत के विभिन्न राज्यों में खोले जा रहे है तथा इसकी किस्ते भावी पीढ़ियों को प्राप्त होती रहेगी। यह एक दिन का भण्डारा नहीं कि खाया और खत्म हो गया बल्कि यह तो आजीवन का पैकेज है जो जीवन भर प्राणदायी आॅक्सीजन देते रहेगा।
 
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी पूज्य संतों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। आज मानस कथा के मंच स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपनी-अपनी ’’देवभक्ति के साथ राष्ट्र भक्ति’’ का संकल्प कराया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ सभी पूज्य संतों ने वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। स्वामी जी महाराज ने कहा कि वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी जल के प्रति जागरूकता का संदेश देती है ताकि हम सभी दूसरों को भी जल संरक्षण के लिये प्रेरित करते रहें। स्वामी जी ने पूज्य संतों के साथ जल संरक्षण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मासिक धर्म के प्रति जागरूकता, भ्रूण हत्या जैसी अनेक समस्याओं पर चर्चा करते हुये कहा कि अपने अपने प्रवचनों और कथाओं के माध्यम से इन मुद्दों के प्रति समाज को जागरूक करते रहे। आज की मानस कथा के विश्राम के समय नंदू भैय्या जी ने बहुत ही दिव्य भजन गाकर सभी को आनन्दित किया।
       
 

leave a reply

धर्म

Live: ख़बरें सबसे तेज़

प्रमुख श्रेणी