... तो ये थी रहस्यमयी रावण की अधूरी इच्छाएं

Foto

 

धर्म के समाचार/Religion news

 

लखनऊ। दशहरा त्योहार शुक्रवार को पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। बुराई बुराई पर अच्छाई की जीत  के त्योहार के रूप में दशहरा मनाया जाता है। सर्वविदित है कि भगवान श्रीराम ने माता सीता को लंका से छुड़ाने के लिए रावण का वध किया था। लेकिन क्या आपको पता है कि रावण महान पंडित होने के साथ ही कुछ ऐसे असंभव काम को करने की क्षमता रखता था जिसे कोई नहीं कर पाता। हम आपको रावण के इस रहस्य को बता रहे हैं। जिसे जानकर आपको भी आश्चर्य होगा कि रावण कितना शक्तिशाली था। 

 

 

भगवान शंकर का भक्त

 

भगवान शंकर का रावण परम भक्त था। इसलिए काल को भी उसने जीत लिया था। वह महापंडित और महाज्ञानी था। लेकिन अहंकार उसके अंदर आ गया था। इस वजह से वह खुद को भगवान से भी बढ़कर मानने लगा था। भगवान के बनाए नियमों को भी बदलने की ताकत रखता था। यही नहीं वह कुछ नियमों को बदलना भी चाहता था। यदि वह जीवीत रहता तो अपने इस कार्य में सफल भी हो जाता। लेकिन उसे अहंकार में लगने लगा था कि वह स्वयं ही भगवान है और जब जो चाहे कर सकता था। यही उसकी सबसे बड़ी भूल थी। वह भगवान के बनाए नियमों को बदलना चाहता था। 

 

 

ये थी रावण की इच्छा

 

- रावण पृथ्वी से स्वर्ग तक सीढ़ी बनाना चाहता था। ताकि हर कोई स्वर्ग तक सीधे जा सके। उसने यह कार्य शुरू भी कर दिया था। लेकिन जब तक सीढ़ियां बनकर पूरी तैयार होती वह भगवान श्रीराम के हाथो मारा गया। 

- रावण की दूसरी चाह थी कि समुद्र के पानी को मीठा बना दे। चूंकि पृथ्वी पर लोगों के लिए पीने के पानी उसे कम लगता था। और वास्तविकता में देखा जाए तो पीने लायक शुद्ध पानी धरती पर कम ही है। अधिक भागों में समुद्र का पानी ही विद्यमान है। यदि रावण अपने इस मकसद में सफल होता तो पृथ्वी पर हमेशा के लिए पानी की समस्या ही खत्म हो जाती। 

- रावण की तीसरी इच्छा थी कि वह सोना को सुगंधित बना दे। वह सोना का बहुत ही शौकीन था। इस वजह से ही उसने सोने की लंका बनवाई थी। वह चाहता था कि यदि सोना सुगंधित हो जाएगा तो इसे खोजने में आसानी होगी। 

- रावण की चौथी इच्छा थी कि वह धरती के सभी लोग गोरे दिखें। चूंकि वह स्वयं काला था। इससे लोगों के प्रति वैमनस्यता नहीं फैलती। 

- रावण की पांचवी इच्छा थी कि खून का कलर वह सफेद कर दे। ताकि जब भी वह किसी की हत्या करे तो पता ही नहीं चले। 

- रावण की इच्छा थी कि सभी उसकी पूजा करें और भगवान की पूजा करना बंद कर दें। लेकिन माता सीता का हरण करने की उसने सबसे बड़ी भूल कर दी। अहंकार में चूर होने के कारण वह कोई भी काम पूरा नहीं कर सका। 

 

यह भी पढ़ें...यहां रावण दहन नहीं, उसकी पूजा होती है

 

यह भी पढ़ें...रावण के साथ बलात्कारी का भी जलेगा पुतला

leave a reply

धर्म

Live: ख़बरें सबसे तेज़

प्रमुख श्रेणी