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यहां रावण दहन नहीं, उसकी पूजा होती है

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धर्म के समाचार/Religion news

 

लखनऊ। दशहरा त्योहार हिन्दू धर्म में धूमधाम से मनाया जाता है। गुरुवार को नवरात्रि की समाप्ति के बाद यह त्योहार 19 अक्टूबर को धूमधाम से देशभर में मनाया जाएगा। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रावण का अंत करके अच्छाई पर बुराई की जीत को स्थापित किया था। इस दिन लोग रावण दहन करते हैं और भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं। लेकिन आपको बता दें कि रावण महान पंडित और भगवान ​शंकर का भक्त था। यहां तक कि उसने अपने पराक्रम और प्रताप से इंद्र, यक्षों, नवग्रहों और तो और यमराज को भी बंदी बना लिया था। उसके इसी प्रताप के कारण आज भी भारत में स्थित इन 6 मंदिरों में पूजा भी होती है। 

 


रावण के 6 प्रसिद्ध मंदिर

 

हिमाचल प्रदेश

 

मान्यता है कि हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ कस्बे में रावण ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। इस कस्बे से होते हुए वह भगवान के शिवलिंग होकर लंका के लिए गुजरा था। हालांकि, यहां रावण का कोई मंदिर नहीं है। यहां लोग घूमने के लिए जरूर जाते हैं। रावण को यहां पर जलाया नहीं जाता। 

 


 

दशानन मंदिर

 

यूपी के कानपुर स्थित शिवाला में रावण का दशानन मंदिर आज भी विद्यमान है। यह केवल दशहरा के दिन ही खोला जाता है। साल भर में एक बार खुलने के कारण लोग इस मंदिर के बारे में बहुत कम ही जानते हैं। दशहरे के दिन यहां रावण का भव्य श्रृंगार किया जाता है। यह मंदिर 1890 में बना था। मान्यता है कि जो भी इस मंदिर में तेल के दिए जलाकर कुछ मांगता उसे उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। 


 

रावण का ससुराल

 

राजस्थान के मंडोर जोधपुर में ही रावण का ससुराल था, ऐसा माना जाता है। यहां के लोग स्वयं को ही रावण का वंशज मानते हैं। इसलिए रावण की धूमधाम से पूजा की जाती है। मंडोर में ही मंदोदरी का मंदिर भी मौजूद है। यहां दशहरे के दिन लोक रावण की मृत्यु के कारण ही शोकर मनाते हैं। 

 

मध्य प्रदेश

 

मध्य प्रदेश के विदिशा में रावण के 10 फीट की प्रतिमा विद्यमान है। इस स्थान को रानी मंदोदरी का जन्म स्थल माना जाता है। दशहरे के दिन यहां रावण की पूजा होती है। साथ ही आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। 

 

 

मंदसौर

 

एमपी के मंदसौर में भी रावण की पूजा होती है। यह रावण का सबसे पहला मंदिर माना जाता है। इस जगह पर रावण रुण्डी नाम से एक विशाल मूर्ति रावण की विद्यमान है। इस मूर्ति के सामने से महिलाएं सिर ढंककर ही निकलती हैं। मान्यता है कि रानी मंदोदरी के नाम पर इस स्थान का नाम मंदसौर पड़ा और मंदसौर का दामाद रावण को माना जाता है। 

 

 कोलार

 

कर्नाटक के कोलार में रावण की पूजा की जाती है। यहां लंकेश्वर महोत्सव का अयोजन करने के साथ ही जुलूस भी निकालने की परंपरा है। यहां रावण के साथ ही भगवान शंकर की मूर्ति को एकसाथ घुमाया जाता है। यहां मालवल्ली तहसील में भी रावण का एक मंदिर मौजूद है। 

 

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