दस दिवसीय पुस्तक मेले का आयोजन

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सरोकार न्यूज/Concern news

 

लखनऊ। अमूमन बुक्स का नाम हमारे मन मस्तिष्क में पाठ्य सामग्री के रूप में आता है। लेकिन यहां पुस्तकें अपना मूल स्वरूप खो कर एक कलाकृति के रूप में प्रदर्शित होंगी, जो केवल दृश्यकला का रूप है। दरअसल, यह प्रदर्शनी लखनऊ पुस्तक मेले में लगाई जा रही है। जिसको ध्यान में रखते हुए सभी कलाकृतियां, पुस्तकों को विभिन्न स्वरूप में कला, शिल्प का रूप दिया गया। यह एक बड़ा दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत हो रहीं है। हालांकि, कलाकार की पुस्तकें कई रूप ले सकती हैं, लेकिन कुछ ऐसे तत्व हैं जो पूरे अभ्यास के दौरान आम हैं। एक कलाकृति के रूप में एक किताब को समझने के लिए पुस्तक के रूप में स्वयं के गुणों पर एक प्रतिबिंब आमंत्रित करता है।


पहली बार प्रदर्शनी

 
इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि इस तरह की प्रदर्शनी उत्तर प्रदेश में पहली बार लगाई जा रही है। इस प्रदर्शनी में चार राष्ट्रीय पुरस्कार ललित कला अकादमी द्वारा सम्मानित कलाकार भाग ले रहे हैं। इस प्रदर्शनी में भारत के महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार,दिल्ली,असम के 13 कलाकार उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से धीरज यादव,राजेश सिंह,अम्बरीष मिश्रा,जलज यादव,सुनील काली , बनारस से अपूर्व, दिल्ली से अनिल बोडवाल, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, असम से विनय पॉल, पुणे महाराष्ट्र से मंगेश काले , मुम्बई विक्रांत भिसे , बिहार से रवि प्रकाश, भूपेंद्र कुमार अस्थाना अपने कलाकृतियों को प्रदर्शित कर रहे हैं। प्रदर्शनी में लगभग 20 कलाकृतियां प्रदर्शित होंगी। आज कला में प्रयोग के नित नए नए प्रयोग हो रहे हैं। 

 

स्थापन कला का रूप

 

अब माध्यमों का दायरा असीमित हो चुका है। जो स्थापन कला का एक रूप धारण कर रहा है। कला हमारे विचारों को भोजन देती हैं। इन्ही नए विचारों से प्रभावित युवा कलाकारों ने कुछ विष्मयकारी प्रयोग किये हैं। आज के युवा कलाकार रूढ़िवादी विचारों के चौखट से कला को मुक्त करके विचार शक्ति को आगे बढ़ा रहे हैं। नई नई तकनीकों ने उनकी सोच को विशिष्ट आयाम दिया है। कला में नवीन गति बनाये रखने के लिए प्रयोग अनिवार्य है। यह कलाकारों का कला सृजन के लिए कला धर्म है।


प्रदर्शनी का अवलोकन करें


इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलाकृतियों पर कवि एवं कला समीक्षक राजेश कुमार व्यास ने भी अपने लेख रूप में विचार प्रकट किए हैं। जिन्हें हम प्रदर्शनी स्थल पर पढ़ सकते है।  पुस्तकों के इन कला रूपों का यही सौन्दर्य संधान है। रंग, रेखाओं में यहां किताबों की कला भाषा को बांचा ही नही जा सकता। सिर्फ देखा, सुना और गुना जा सकता है। उन्होंने कहा कि नगर के समस्त कला प्रेमियों कला रसिकों से आग्रह है कि वे इस पुस्तक मेले में आयें और इस विशेष आकर्षण के केंद्र कला प्रदर्शनी का अवलोकन जरूर करें।

 

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