अफसरों की उदासीनता से स्वच्छता मिशन पर लग रहा है पलीता 

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जेडी द्विवेदी

बांदा। स्वच्छ भारत मिशन के स्वच्छता मिशन पर जहां सत्ता पक्ष की सरकार, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए स्वच्छता मिशन की हिमायत करते हुए नजर आती है। वहीं जिले के कई आम रास्ते एवं सार्वजनिक स्थल पर कूड़े का ढेर और बज बजाती नालियां स्वच्छता पर सवालिया निशान जरूर लगाते हुए यह अपने आप पर प्रश्न छोड़ जाते हैं, की संबंधित प्रशासनिक तंत्र केवल स्लोगन और कागजों में ही स्वच्छता के पैरोकार बने हुए हैं। इस अभियान पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर भी स्वच्छता की सकारात्मक मिसाल पेश करने में विफल साबित हो रही है।

स्वच्छता की मिसाल पेश करने वाली सरकार के सभी आदेश हवा हवाई साबित हो रहे हैं , जो जिले के आम चर्चित रास्तों को देख कर वास्तविकता से स्वयं में रूबरू हो सकते हैं, जो इन दिनों पंडित जे.एन.पी.जी. कालेज से कालू कुआँ जाते वक्त बिजली खेड़ा मोहल्ले में स्वच्छता को चिढ़ाते हुए कूड़े के ढेर , यह उत्तरदायित्वो का निर्वहन करने वाले जिम्मेदार लोगों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं, कि स्वच्छ भारत सुंदर भारत का नारा देने वाले अपने आप में स्वयं शर्मिंदा हो जाएं।

 गंदगी के अंबार को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है की स्वच्छता पर गंदगी की पराकाष्ठा भारी है। 

स्वच्छता की धज्जियां उड़ाते हुए इसी क्रम में जिले के चमरौडी चौराहा के पास गायत्री नगर में भी देखी जा सकती है। जिसको देखकर स्वच्छता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ना समुचित जल निकासी का प्रबंध है और ना ही आवागमन के रास्ते की साफ सफाई की।

स्थानी मोहल्ले वासियों का कहना है कि सफाई कर्मचारी 15 दिनों में एक बार आता है जिसकी वजह से आम रास्ते पर कूड़े का अंबार लगना लाजिमी है।

अब देखना यह होगा की वास्तविक स्वछता मिशन की हिमायत करने वाली सत्ता पक्ष की सरकार जिले के प्रशासनिक तंत्र को स्वच्छता के प्रति कितना सकारात्मक निर्देशों पर स्वच्छता का पालन करवाने में सफल हो पाती है।  बशर्ते वर्तमान स्थिति को देखकर स्वच्छता मिशन पर सिर्फ औपचारिक रस्म अदायगी पर ही स्वच्छता सिमट कर ही रह गयी है।

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