जज आरामदायक क्षेत्र में बैठते हैं जहां पर कोई सवाल नहीं उठाता है : मनोज तिवारी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक मकान की सीलिंग तोड़ने के मामले में सुनवाई के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि जज आरामदायक क्षेत्र में बैठते हैं जहां पर कोई सवाल नहीं उठाता है। वहीं मुझसे लोग सवाल पूछते है और मैं लोगों के प्रति जवाबदेह हूं। बीते 16 सितंबर को उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोकलपुर गांव में एक मकान की सीलिंग तोड़ने के मामले में मंगलवार (30 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान बीजेपी सांसद ने कहा कि उन्होंने सीलिंग तोड़कर कोर्ट की अवमानना नहीं की है। 

सुनवाई के दौरान निगरानी समिति ने कोर्ट से मांग की कि मनोज तिवारी को सीलिंग मामले में जेल न भेजा जाए बल्कि उन पर ​केवल जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाये। इस पर कमेटी ने कहा कि चूंकि मनोज तिवारी बीजेपी के नेता है और वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए जेल जाना चाहते हैं। 

दरअसल 16 सितंबर को दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोकलपुर गांव में एक मकान की सीलिंग तोड़ी थी। इसकी जानकारी मॉनिटरिंग कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तिवारी के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी कर 25 सितंबर को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। वहीं 25 सितंबर को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर उन्हें सीलिंग की इतनी जानकारी है तो क्यों ना उन्हें ही सीलिंग आॅफिसर बना दिया जाए। 

इसके बाद दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था​ कि वह सीलिंग तोड़ने के लिए माफी नहीं मांगेंगे। इतना ही नहीं, मनोज तिवारी ने तो यहां तक कह दिया था कि कोर्ट अपनी मॉनिटरिंग कमेटी भंग करे। वह खुद सीलिंग आॅफिसर बनने को तैयार है। हलफनामें में तिवारी ने कहा था कि मैं सीलिंग तोड़ने के लिए माफी नहीं मांगूगा। 

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