मोदी से मुस्लिमों में दहशत! दोबारा पीएम बने तो छोड़ना पड़ेगा...

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बुलंदशहर। पीएम नरेन्द्र मोदी को लेकर हमेशा से ही कुछ इस तरह की घिनौनी राजनीति देखने को मिली है कि उनकी सरकार में मुस्लिमों का उत्पीड़न होता है। राजनीति का आलम यह है कि मुस्लिमों में भी पीएम मोदी को लेकर कुछ इसी तरह की छवि बनती जा रही है। यही नहीं अब मुस्लिमों की ओर से यह आवाजें भी उठने लगी हैं कि यदि दोबारा पीएम मोदी की सरकार बनती है, तो गांव छोड़ना पड़ेगा। यह कहना है, यूपी के नयाबांस के मुसलमानों का।

बताते चलें कि यहां हिन्दू और मुस्लिमों में बिल्कुल भी नहीं बनती। यहां तक कि दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे से बात तक नहीं करते। रॉयटर्स के एक रिपोर्ट की माने तो  बुलंदशहर स्थित उक्त गांव में पहले ऐसी विचारधारा नहीं थी। हिन्दू और मुस्लिम आपसी सौहार्द से रहते थे। लेकिन अब मुस्लिमों के अंदर ये भय है कि 2 वर्षों में ही दोनों समुदायों के मध्य ध्रुवीकरण बढ़ गई है। यहां तक कि अब मुस्लिम गांव से जाने का मन बना रहे हैं। 

खबरों के मुताबिक एजेंसी से बात करते हुए मुस्लिमों ने यहां तक कहा दिया कि यदि बीजेपी दोबारा सत्ता में हाई तो तनाव और भी अधिक बढ़ जाएगा। यही नहीं यह भी कहा कि बीजेपी सरकार आने के पहले दोनों ही समुदायों में अच्छी बनती थी। केन्द्र में पीएम मोदी और यूपी में सीएम योगी सरकार आने की वजह से सबकुछ गड़बड़ होता जा रहा है। यही नहीं लोग बताते हैं कि यहां से तरकीबन एक दर्जन मुस्लिम 2 सालों के भीतर गांव छोड़कर जा भी चुके हैं। 

बता दें कि नयाबांस गांव की आबादी करीब 4 हजार है। जिसमें करीब 400 मुस्लिम रहते हैं। यहां कुछ हिन्दुओं ने यह शिकायत किया कि मुस्लिमों का गाय काटते देखा है। इसके बाद यह आग इतनी फैली कि एक पुलिस अधिकारी को मौत के घाट उतार दिया गया था। हालांकि, बीजेपी हमेशा ही यह बात कहती रही है कि हिन्दु मुस्लिम धर्म को बांटने की राजनीति करते हैं। पांच माह पूर्व हुई उस घटना से यहां पर लोग भय से अभी तक बाहर नहीं आ पाए हैं। 

बताते चलें कि यदि पुराना इतिहास देखा जाए तो पहले भी यहां विवाद हिन्दू मुस्लिम में होते रहे हैं। 1977 में मस्जिद बनाने को लेकर यहां दंगा भड़क गया था। इस दंगे में 2 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, उस समय कुछ दिनों बात ही हालात सामान्य हो गए थे। लेकिन अब यूपी में सीएम योगी की सरकार बनने के बाद कट्टर हिन्दू अपना अधिक अधिकार जताने लगे हैं। यह भी आरोप लगा है कि 2017 के समय रमजान के पाक महीने में कुछ हिन्दू कार्यकर्ताओं ने यह मांग किया कि मदरसे में लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाए। इसके बाद मुस्लिमों को न चाहकर भी ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

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