नालियां व सड़कों पर पड़े कूड़े के ढेर, करोड़ों डकार रही कंपनियां

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लखनऊ। आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव गौरव माहेश्वरी ने बताया कि स्वच्छ भारत सर्वेक्षण की शीर्ष रैंकिंग में शुमार लखनऊ की साफ़-सफाई का व्यक्तिगत निरीक्षण किया। पिछले अंक में सीतापुर रोड को कैसरबाग व अमीनाबाद से जोड़ने वाली सड़क के निरीक्षण के दौरान पाया कि सिटी स्टेशन के सामने वाली सड़क जो अमीनाबाद जैसे प्रमुख बाजार को जोडती है, पर जगह-जगह सड़कों पर खुला कूड़ा पड़ा हुआ है। उसमें पड़ी प्लास्टिक गायें खा रही थीं, जो उनके लिए घातक है। इसी तरह सिटी स्टेशन के अंडरपास के नीचे नालियां बजबजा रहीं थी और आने-जाने वाले लोग मुह बंद कर वहां से निकलने को मजबूर थे।

 

उन्होंने कहा कि स्वच्छ अभियान की पोल खालेने के लिए उन्होंने अपने स्तर पर अभियान चलाया। इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया और मीडिया को सौंपी। यह तस्वीरें नगर निगम व सरकार की नाकामी की दास्तान बयां कर रही हैं। माहेश्वरी ने आगे की कड़ी में कैसरबाग के आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया।  जिसमें उन्होंने पाया कि बलरामपुर अस्पताल को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क पर नालियां चोक हैं। इसके अलावा सड़कों पर खुले में कूड़ा पड़ा हुआ है। जिसमें से बदबू तो आ ही रही है, साथ ही खुले में घूम रही गाएं उनमें पड़ी पॉलिथीन खाकर मर रही हैं।

 

 

कूड़ा निस्तारण और डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के नाम पर करोड़ों रुपये सालाना खर्च करने के बाद भी ऐसी स्थिति क्यों है? उन्होंने योगी सरकार से सवाल किया कि क्या गो भक्ति उनके लिए एक वर्ग विशेष को साधने के लिए दिखावा है? ऐसा नहीं है तो लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में सरकार बनने के इतने सालों बाद भी गोवंश खुले में क्यों घूम रहे हैं? क्यों वो सड़कों पे पड़े कूड़े की प्लास्टिक खा के मर रहे हैं?

 

     
उन्होंने कहा कि लखनऊ की मेयर व योगी सरकार शहर की साफ़-सफाई के नाम पर सिर्फ जुबानी जमा खर्च कर रहे हैं। कागजों पर आंकडें दुरुस्त कर रहे हैं। धरातल पर उनका प्रदर्शन पिछली सरकार से कुछ अलग नहीं है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के नाम पर पिछली सरकारों में भी बिना काम के कमीशन ले के भुगतान किया जाता था और आज भी हो रहा है। कम्पनियां आज भी नगर निगम अधिकारियों व सत्ता से मिलकर करोड़ों डकार रही हैं। आम जनता आज भी सड़कों पर पड़े कूड़े से आती बदबू से नाक बंद कर और बजबजाती नालियों के गंदे पानी से बचके निकलने को विवश हैं।

 

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