तबाही के डर से धरने पर ग्रामीण, डीएम फरमा रहे आराम

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प्रदीप मिश्रा 

गोरखपुर। जनपद के खजनी तहसील के अंतर्गत विभिन्न मांगों को लेकर विकासखंड बेलघाट के अंतर्गत राजस्व ग्राम बसही में समस्त क्षेत्रवासी अनिश्चित धरने पर बैठे हैं।
बता दें कि मामला मुख्यमंत्री योगी के गृह जनपद का है। विकासखंड बेलाघाट के अंतर्गत राजस्व ग्राम बसई जो सरयू नदी के तट पर बसा है। ऐसे में आसपास के इलाकों में सरयू नदी बाढ़ का कहर बर पाती है। तीव्र जलधारा चलने से लगातार बंधे को काटते हुए दिख रही है। यह मामला डीएम के संज्ञान में भी है, लेकिन उनको आराम फरमाने से फुर्सत नहीं कि ग्रामीणों की समस्या का समाधान करें। यह बात अलग है कि भविष्य में बड़ा हादसा हो जाए तो अधिकारी उल्टे पैर दिखावटी करते हुए काम में जुट जाएं और सरकार भी एक्शन मूड में आए।

समस्त क्षेत्रवासी तटबंध को मजबूत एवं सरयू की धारा मोड़ने के लिए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इनकी प्रमुख मांगे हैं, तटबंध को मजबूत करना एवं नदी की धारा को मोड़ने की व्यवस्था की जाए। किसानों की जो जमीन नदी में विलीन हो गई है, उसका उचित मुआवजा दिया जाए एवं जो जमीन सिंचाई विभाग द्वारा बंधे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की जा रही है, उस का सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाए। यह धरना 4 जनवरी 2019 से अनवरत जारी है। धरने का नेतृत्व बसही निवासी अखिलेश सिंह कर रहे हैं। राजेश मौर्या सुभाष यादव अरविंद मौर्या वीरेंद्र सिंह भीम प्रसाद एवं समस्त क्षेत्रवासी इस अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

प्रशासन ग्रामीणों के धरने को लगातार नजर अंदाज करता आ रहा है। खजनी उप जिलाधिकारी ने मौके का मुआयना कर डीएम गोरखपुर को यह मामला अवगत कराया। लेकिन इस पर कोई विचार नहीं किया गया। तत्पश्चात अखिलेश सिंह ने 2 अप्रैल को यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाया। सीएम योगी ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए धारा मोड़ने एवं तटबंध को मजबूत करने के लिए आश्वस्त किया। लेकिन अभी तक सरकार के तरफ से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

प्रशासन की इस लापरवाही से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सरयू की जलधारा लगातार बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता का विषय बना हुआ है। जहां तक बांध मजबूत नहीं है, नदी धीरे धीरे बंधे को काटते हुए नजर आ रही। ऐसे में हमारा गांव कैसे सुरक्षित रहेगा। अगर बंधा टूटा तो इस क्षेत्र के 70% गांव जलमग्न हो जाएंगे। जो आने वाले समय में एक तबाही का कारण हो सकता है। जिससे अपार धन जन की हानि होगी जो अपने आप में किसी प्रलय से कम नहीं होगी।

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