फिल्म ‘रामजन्मभूमि’ देखने पर जारी किया फतवा, रोक लगाने की मांग

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लखनऊ। अयोध्या में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के बीच हल निकालने का आदेश दिया है। पांच जजों की संविधान पीठ ने यह अहम आदेश दिया था। साथ ही आपस में होने वाली वार्ता को गोपनीय रखने का आदेश भी दिया था। अब अयोध्या को लेकर बनी फिल्म ‘रामजन्मभूमि’ ने फिर राम मंदिर मुद्दा को छेड़ दिया है। मुस्लिम समुदायों स फिल्म का विरोध भी कर रहे हैं। यही नहीं फिल्म देखने पर फतवा जारी किया गया है। 

 

बताते चलें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य तथा बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक ज़फ़रयाब जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वह यह बात पहले भी मान चुके हैं कि मध्यस्थता में पूरा सहयोग किया जाएगा। उनको जो भी बात कहनी है, वह मध्यस्थता पैनल के सामने ही बात कहेंगे। इसके बाहर वह कुछ  भी नहीं बोलेंगे।


(एआईयूबी) ने मुस्लिमों को ‘राम जन्मभूमि’ फिल्म देखने पर रोक लगाते हुए फतवा जारी कर दिया है। यह भी कहा कि मुस्लिम अभिनेत्री आस्था बहाल करे। साथ ही केन्द्र और एमपी सरकर से फिल्म के रिलीज होने पर रोक लगाने की मांग की है। रोक लगाने की मांग करते हुए तर्क दिया कि दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने का काम ये फिल्म करेगी। वहीं, जब राम जन्मभूमि विवाद को मध्यस्थता कर आपसी बातचीत से हल करने की कवायद चल रही तो ये फिल्म माहौल को बिगाड़ने के अलावा कुछ नहीं करेंगे।


बताते चलें कि यह फिल्म उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने बनाया है। इस फिल्म में रामजन्मभूमि से जुड़े कई मुद्दों को दिखाया गया है। इस फिल्म में आंदोलन वाला सीन भी दर्शाया गया है। ये फिल्म आगामी 29 अप्रैल को रिलीज होने जा रही है।  लेकिन रिलीज से पहले ही फिल्म पर बैन लगाने की मांग उठने लगी है। एआईयूबी की मध्य प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष नूरुउल्लाह यूसुफजयी ने समर्थन करते हुए कहा यह फिल्म लोकसभा चुनाव तक पूरी तरह से बैन कर दिया जाना चाहिए। यह फिल्म निर्माताओं की दो समुदायों में मतभेद को को लेकर बड़ी साजिश है।

 

 

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