यहां पर स्नान मात्र से मुक्त हो जाते है जन्म जन्मातर के पाप

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फहीम अख्तर

एटा/कासगंज। माघ मास की पूर्णिमा पर्व पर कासगंज जनपद के गंगाघाट सोरों हरपदीय, लहरा, कछला, कादरगंज गंगाघाट हर हर गंगे के जयकारो से गूंजायमान हो गये। हजारो की संख्या मै श्रद्वालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पूजा अर्चना की और पुण्य लाभ कामया।कहा जाता है कि इस हरपदीय गंगाकुंड में मात्र स्नान करने से जन्म जन्मातर के पाप मुक्त हो जाते हैं।

आपको बता देकि माघ मास की पूर्णिमा पर्व पर गंगा स्नान कर दान पुण्य करने को विशेष महत्व होता है।इसी को लेकर मंगलवार की सुबह से सोरों हरपदीय, लहरा, कछला,गंगाघाटो पर हजारों की संख्या मै स्नानार्थियों का सैलाब उमड गया। सबसे अधिक भीड स्नानार्थियों की सोरों हरपदीय गंगाघाट पर देखने को मिली।

जहां श्रद्धालुओ ने हर हर गंगे के जयकारो के साथ हरपदीय गंगाकुंड मै आस्था की डुबकी लगाई।बाद मै श्रद्वालुओं ने बच्चो का मुंडन संस्कार करा  कर मंदिरो मै पूजा अर्चना की और बच्चो को भोज कराकर दान पुण्य किया। जब हमने सोरों तीर्थ पुरोहित ओमी चाचा ने मान्यता के बारे में जानकारी देते हुए बताया देते हुए बताया कि राजा सोमदत्त सोलंकी ने  सोरों तीर्थ नगरी को बसाया था।

उनकी महाभारत के युद्व में देहांत हो गया। यहां लोग अपने मृतक पूर्वजो का पिंडदान करने आते हैं, जो अस्थियां विसर्जित की जाती हैं, वो मात्र 72 घंटे के अंदर पानी में घुल मिल जाती हैं।यहां स्नान करने का महत्व बहुत बड़ा हैं, इसके महत्वो से देश देशांतर और जन्म, जन्मांतर के पाप दूर हो जाते हैं।

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